उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्र 2022 के बाद दिल्ली और मुम्बई को भी छोड़ देंगे पीछे ।

 

उत्तराखंड को अलग राज्य बने लगभग बीस साल होने को आए। विकास के नाम पर कुछ ही जगहों की तरक्की हुई, वो भी मैदानी क्षेत्र में आते हैं। जहाँ भीड़ होती है वहाँ रोजगार के कुछ साधन स्वतः ही उत्पन्न हो जाते हैं। भीड़ जहां होती है वहाँ आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करने हेतु अनेक लोगों को रोजगार मिल जाता है। हरिद्वार, ऋषिकेश और देहरादून जैसे शहरों में भी इसी आधार पर थोड़ा बहुत रोजगार है। अन्यथा राज्य बनने के बाद न तो देहरादून में इंडस्ट्रीज लगी,न ऋषिकेश में, हरिद्वार में जो कुछ थी वह पूर्व से ही चली आ रही हैं। और पहाड़ों पर तो जीरो बटे सन्नाटा है और जहां कुछ जगह कुमाऊँ में है भी, वह भी पूर्व से ही संचालित थी। हाँ, गढ़वाल क्षेत्र में एक दारू की फैक्ट्री जरूर सरकार ने स्थापित की है। लेकिन अब लग रहा है 2022 के बाद पहाड़ों पर विकास दौड़ लगायेगा।

जी हाँ, ये "पहाड़ समीक्षा" नही कह रहा बल्कि आज कल नेता कह रहे हैं। पहाड़ों का सर्वाधिक विनाश करने वाले आज बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं। कोई कह रहा है हम बिजली मुफ्त करेंगे, कोई कह रहा है पानी मुफ्त करेंगे, कोई दोनों ही मुफ्त करने की बात कर रहा है। कोई कह रहा है हम 80% युवाओं के रोजगार का प्रबन्ध राज्य में ही करेंगे , कोई कह रहा है हम गांव लौटे युवाओं को गांव में ही रोजगार देंगे। सबसे बड़ी बात की 2022 के बाद राजधानी गैरसैण होगी ये सभी कह रहे हैं। ये वही राजधानी नाम की संज्ञा है जो राज्य अलग होते हुए समिति की रिपोर्ट में गई थी लेकिन आज तक हुई नही है। राज्य में 2022 के चुनाव के लिए चार पार्टियां दम भर रही हैं। जिनके नाम क्रमशः है- भाजपा, कांग्रेस, यूकेडी और आम आदमी पार्टी। प्रथम तीन तो राज्य में राज्य गठन से ही हैं लेकिन इस बार आम आदमी पार्टी भी पहाड़ो और पहाड़ियों के लिए कूद पड़ी है।

2022 के मुद्दे:- भाजपा कह रही है कि उनकी सरकार पहाड़ों पर लौटे युवाओं को उनके क्षेत्र में ही रोजगार देगी। क्योंकि पार्टी वर्तमान में सत्ता में है तो उन्होंने इस ओर प्रयास भी किया। लेकिन उनके प्रयासों का फायदा युवाओं को मिलता नजर नही आ रहा है। दूसरा मुद्दा कि राजधानी गैरसैण ही बनेगी, भले आज भी किसी सरकारी वेबसाइट पर राजधानी गैरसैंण का जिक्र नही है। इनके बाद बारी आती है कांग्रेस की, कांग्रेस कह रही है कि हमारी सरकार आई तो बिजली, पानी, रोजगार और गैरसैण राजधानी जैसे मुद्दों पर काम करेगी। आज तक क्यों नही किया ? ये पता नही, लेकिन 2022 के बाद करेगी। तीसरे नम्बर पर है उत्तराखंड क्रांति दल, और इस बार यूकेडी की कमान है दीवाकर भट्ट के हाथों में। समझेदार बात ये है कि वो भी कह रहे हैं बिजिली,पानी और घर वापस लौटे युवाओं को यहीं राज्य में रोजगार देंगे और राजधानी गैरसैंण बनायेंगे।

अब हम "पहाड़ समीक्षा" के माध्यम से यह पूछना चाहते हैं कि रोजगार दोगे कैसे ? जब इंडस्ट्रीज हैं नहीं, दूसरा राज्य में तीनों सरकारों के नेताओं की सक्रियता रही और आज भी है। तो अब तक पहाड़ियों कि शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और रोजगार की याद क्यों नही आयी ? अलग राज्य की मांग तो केवल एक ही आधार पर हुई थी और वह थी कि उत्तराखंड के दूर-दराज के क्षेत्रों तक सरकार की मदद नही पहुंच पाती है। तो सन 2000 के बाद भी आज तक बोर्ड इलाकों में मोबाइल, बिजली और सड़के जैसी मूलभूत सुविधाएं क्यों नही पहुंची ? पहाड़ों पर सरकारी स्कूलों के हालात इतने खस्ता क्यों हो गए ? श्रीनगर, श्रीकोट जैसे हस्पतालों में सभी विभागों के डॉक्टर क्यों नही हैं ? और राज्य में 25-26 बाँध परियोजनाओं के होते हुए भी पहाड़ी क्षेत्र के लोगों से पैसा किस आधार पर वसूल रही है सरकार ? जबकि अधिकांश बांध पहाड़ी क्षेत्रों में ही स्थित हैं। आम आदमी पार्टी पहली बार उत्तराखंड से चुनाव लड़ रही है लेकिन पार्टी को दिल्ली और उत्तराखंड में अंतर समझना होगा । पार्टी के मुद्दे वही हैं जो दिल्ली में थे, मुद्दे गलत नही हैं लेकिन मुद्दों पर सत्ता में आने के बाद बने रहना, एक चुनौती है। फिर भीसवाल तो सबसे पूछा ही जायेग कि तुम 2022 के बाद पहाड़ी क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार दोगे, लेकिन दोगे कैसे ? जितने 2022 के चुनाव की चाह में तुम आज फुदक रहे हो इसका 20% काम भी हर पांच वर्ष में किया होता तो आज उत्तराखंड की तस्वीर ही कुछ और होती ।


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