उत्तराखंड सरकार लगातार हर जगह पदोन्नित से पद भरे जा रही है। पिछले कई वर्षो से राज्य में नायब तहसीलदार तक पर भी किसी प्रकार परीक्षाएं आयोजित नही हुई है। यही स्थिति राज्य में असिस्टेंट इंजीनियर के पदों की भी है, और अन्य कई विभाग है जिनमें पिछले पाँच सात वर्षो से कोई पद निकला ही नही है। सरकार सिर्फ पदोन्नति कर रिक्त स्थानों को भर रही है। फिर चाहे वो एई के पद हों या तहसीलदार के, बस हो रहा है तो प्रमोशन ।


उत्तराखंड में तहसीदारों की कमी को देखते हुए शासन ने अब तहसीलदारों के रिक्त पदों को पदोन्नति से भरने का फैसला किया है। इसके लिए राजस्व सचिव ने डीपीसी का आदेश जारी कर दिया है।  प्रदेश में तहसीलदारों की भारी कमी है, इनके करीब 158 पद हैं। इनमें से 79 पद सीधी भर्ती और 79 पद विभागीय पदोन्नति के हैं। सीधी भर्ती के 45 पदों पर नियुक्तियां हो चुकी हैं और 33 का प्रस्ताव गया हुआ है।


असल परेशानी पदोन्नित के पदों को लेकर है। इन पदों को भरने के लिए अब डीपीसी का आदेश जारी किया गया है। डीपीसी में भी अगर सभी पद नहीं भर पाते हैं तो अन्य विकल्प भी अपनाए जा सकते हैं। तहसीलदारों की कमी को पूरा करने के लिए शासन ने तदर्थ व्यवस्था में बदलाव का फैसला भी किया है। इस व्यवस्था में जिलाधिकारियों, मंडल आयुक्त और राजस्व परिषद को निश्चित समय के लिए तहसीलदारों की तैनाती का अधिकार दिया गया था। राजस्व विभाग के मुताबिक इससे संबंधित अधिसूचना को लेकर संशय जताया गया। अब इस व्यवस्था में नई संशोधित अधिसूचना जारी करने की तैयारी है।


राज्य में अगर इसी प्रकार प्रमोशन का खेल चलता रहा तो युवा तैयारी करके क्या करेंगे। यदि कोई युवा उच्च पद की तैयारी कर रहा हो और पदों पर भर्ती जारी नही की जाए तो ऐसे में युवा के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ का जिम्मेदार कौन होगा।  राज्य में लगातार बेरोजगारी का स्तर बढ़ता जा रहा, जिन छोटे पदों पर बहाली के लिए भर्तियां जारी हो भी रही है वह भी तीन-चार सालों तक प्रक्रिया में ही लटके पड़े हैं। ऐसे में प्रमोशन का खेल कब तक चलेगा पता नही ।