सरकार और स्वास्थ्य विभाग के बीच कोरोना काल में कहीं भी तालमेल नजर नहीं आ रहा है। राज्य में पॉजिटिव-नेगेटिव का खेल बराबर जारी है। ताजा मामला कुमाऊँ, हल्द्वानी से सामने आया है। जहाँ स्वास्थ्य विभाग ने कमलु आगांजा निवासी एक गर्भवती को कोरोना संक्रमित बताकर उसे एसटीएच में भर्ती कर दिया।

26 वर्षीय पूजा बसेड़ा गर्भवती हैं। परिजन उन्हें महिला अस्पताल में भर्ती कराने ले गए। नियमानुसार कोरोना टेस्ट कराना जरूरी है। ऐसे में 21 अगस्त को अस्पताल में ही उसका कोरोना टेस्ट कराया गया। दस्तावेजों में पूजा बसेड़ा की जगह पूजा दर्ज कर दिया गया। मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग का फोन पति भूपेंद्र सिंह के पास आता है बताया जाता है कि पूजा की रिपोर्ट कोरोना पॉजीटिव आई है। दोपहर को स्वास्थ्य विभाग की टीम एबुंलेंस समेत उनके घर पहुंचती है और गर्भवती पूजा बसेड़ा को दोपहर बाद साढ़े तीन बजे एसटीएच के कोरोना वार्ड में भर्ती करा दिया जाता है।

म को परिजनों को बताया जाता है कि गर्भवती की रिपोर्ट निगेटिव है गलती से दूसरी महिला की पॉजीटिव रिपोर्ट उन्हें दे दी गई। इन चार घंटों में परिजनों के साथ जो बीती सो अलग, गर्भवती को भी उस वार्ड में रखा गया जहां कोरोना संक्रमित पहले से ही भर्ती थे। लापरवाही पर पर्दा डालने की कोशिश में गर्भवती को बिना किसी जांच के डिस्चार्ज कर घर रवाना कर दिया गया। ऐसे में यदि गर्भवती अब कोरोना संक्रमित होती है तो इस लापरवाही के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से जिम्मेदार होगा।

डॉ. रश्मि पंत, एसीएमओ नैनीताल ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। जहां तक मेरी जानकारी है गर्भवती व दूसरी महिला का नाम और उम्र एक जैसे ही थे जिसके चलते कन्फ्यूजन की स्थिति बनी थी। हालांकि समय रहते महिला को डिस्चार्ज कर दिया था। एहतियात के तौर पर गर्भवती की दोबारा जांच कराई जाएगी।