गुरुवार कोरोना संक्रमण को लेकर राहत वाला दिन रहा। क्योंकि गरुवार को रिकवरी रेट सही रहा और मौतों का आंकड़ा भी कम रहा। राज्‍य में कुल 411 नए मामले आए,जबकि 301 ठीक हुए। ऊधम सिंह नगर में सबसे ज्‍यादा 125 मामले आए। हरिद्वार में 115 जबकि देहरादून में 87 मामले सामने आए। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष नंद किशोर त्रिपाठी की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। वह विकास भवन में कार्यरत हैं। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की ओर से बताया गया कि जुलाई महीने में पदोन्नति ना होने के खिलाफ चल रहे अभियान से लेकर अभी तक के किसी भी कार्यक्रम में नंद किशोर त्रिपाठी शामिल नहीं हुए थे। इसलिए परिषद के पदाधिकारियों को क्वॉरेंटाइन रहने की आवश्यकता नहीं बताई जा रही है। इस दौरान उनकी किसी से मुलाकात भी नहीं हुई। लेकिन परिषद के कार्यकारी प्रदेश महामंत्री अरुण पांडे ने मांग की है कि विकास भवन में जहां वह कार्यरत हैं, उनके विभाग समेत पूरे भवन का सैनिटाइजेशन कराया जाए। साथ ही कर्मचारियों के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि अन्य कोई कर्मचारी संक्रमित न होने पाए। 

72 वर्षीय व्यक्ति की कोरोना से मौत:- दून मेडिकल कालेज अस्पताल में भर्ती 72 वर्षीय व्यक्ति की कोरोना से आज मौत हो गई। न्यू हरिद्वार कालोनी निवासी व्यक्ति को चार अगस्त को अस्पताल में भर्ती किया गया था। मौत की वजह सेप्टीसेमिक शॉक व रेस्पिरेटरी फेलियर बना। उन्‍हें निमोनिया, बाएं पैर में सेल्यूलाइटिस व अन्य स्वास्थ्य समस्याएं थी। उत्तराखंड में कोरोना लगातार डरा रहा है। यहां न केवल संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है, बल्कि मौत का आंकड़ा भी तेजी से बढ़ रहा है। बुधवार को प्रदेश में कोरोना संक्रमित 11 और मरीजों की मौत हो गई। यह एक दिन में मौत का सर्वाधिक आंकड़ा है। अब तक राज्य में कोरोना संक्रमण के चलते 187 मरीजों की मौत हो चुकी है। इनमें अगस्त में अब तक 105 मरीजों की मौत हुई है। 

मैदानी तथा पहाडी भागों में मौत का अनुपात प्रतिशत 91:09 का चल रहा है। मृत लोगों में अधिकांश वृद्ध हैं और स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मृत्यु को वजह सिर्फ कोरोना नही है, बल्कि साथ में अन्य बीमारियों के कारण ऐसे मिरोजों को रिकवर करने में दिक्कतें आ रही हैं। बढ़ती उम्र के साथ मधुमेह, लीवर का कमजोर होना, हृदय रोग की समस्या जैसी कई बीमारियां मनुष्य को घेर लेती हैं। ऐसे मिरोजों पर कोई भी वायरस जल्दी से असर करता है। कई बार दो अलग अलग बीमारियों की दवा एक साथ लेने से दवा भी रियेक्ट कर जाती हैं जिसके परिमाण जान लेवा भी हो जाते हैं। यही वजह है कि मैदानी क्षेत्र में मृत्यु दर पहाड़ों की अपेक्षा अधिक है। पहाड़ों पर रह रह लोग शाररिक रूप से उतने अनफिट नही है जितने की शहरी लोग, दूसरा खान पान की शुद्धता भी प्रतिरोधक क्षमता को बनाये रखने में काफी असर दायक सिद्ध होती है।