उत्तराखंड को अनाप शनाप कहने वाले विधायक की पार्टी में वापसी से साफ हो गया है कि बीजेपी की करनी और कथनी में कितना फर्क है। जिस विधायक ने उत्तराखंड की जनता की भावनाओ को गाली देकर आहत किया, आखिरकार बीजेपी को सत्ता का भय सताने लगा तो उसको पार्टी में वापस बुला लिया। जो खुले आम बंदूकें लहरा रहा है और वीडियो बनाते हुए उत्तराखंड संस्कृति को गाली दे रहा है, ऐसे लोगों को बीजेपी ही जगह दे सकती है।

भारतीय जनता पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित हरिद्वार के खानपुर से विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन की एक बार फिर से पार्टी में वापसी हो गई है। प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने प्रणव सिंह चैंपियन की पार्टी में वापसी कराई। 13 महीने पहले विधायक को पार्टी विरोधी बयान बाजी और प्रदेश के बारे में अपशब्द कहने पर उन्हें 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया था। विधायक का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वे शराब की बोतलें और बंदूकें लहराते नजर आ रहे थे।

दरअसल हरिद्वार जिले की खानपुर विधानसभा सीट से चौथी बार विधानसभा पहुंचे विधायक प्रणव सिंह चैंपियन अक्सर विवादों से घिरे रहते हैं। विधायक की अनाप-शनाप बयानबाजी और हरकतों से पार्टी को कई बार असहज होना पड़ा है। पिछले साल विधायक प्रणव सिंह चैंपियन का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें विधायक शराब पीते और बंदूकें लहराकर डांस करते हुए नजर आ रहे आये थे। इस वीडियो में विधायक ने उत्तराखंड प्रदेश को भी गाली दी थी जिसके बाद पार्टी के कई बड़े नेताओं के आपत्ति जताने पर शीर्ष नेतृत्व ने विधायक प्रणव सिंह को पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया था। 

लेकिन अब पार्टी को 2022 की चिंता सताने लगी है। जिस वजह से 6 साल का प्रतिबन्ध महज 13 माह में ही खत्म हो गया। ऐसी सरकार पर अगर जनता का भरोसा बना रहे तो किस आधार पर ? जिसका अपने ही नियमों पर प्रतिनिधित्व सही नही है, वह जनता के लिए क्या निष्ठावान रहेंगे। राजनीति से जुड़े लोग आज सिर्फ आपना फायदा देख रहे हैं। जनता किस मुश्किल दौर से गुजर रही है किसी को कोई मतलब नही है। पहाड़ों पर शिक्षा और स्वास्थ्य दिन-ब-दिन गर्त में जा रहे हैं लेकिन इनको तो वही लोग चाहिए जो प्रदेश प्रगति नही बल्कि दारू पीकर गाली दें। हालांकि इसमें उनकी भी गलती नही है। प्रदेश की जनता भी इसमें बराबर की भागीदार है। गधे को घोड़ा मान लेने से चाल थोड़ी बदल जाएगा। यह कोई गणित का सवाल थोड़ी है कि घोड़ो की संख्या को एक्स मान के सिद्ध हो जाएगा कि इतने घोड़े हैं। जनता को जागरूक होना पड़ेगा क्योंकि जनता अपने अधिकारों को ही भूल बैठी है। नेता चाहे बीजेपी का हो, चाहे कांग्रेस का, अगर राज्य विरोधी बात करे या जनहित के कार्यों में खुलकर सामने न आये तो ऐसे व्यक्ति को सत्ता में बैठे रहने का कोई अधिकार नही होना चाहिए।