भू-वैज्ञानिकों ने अगस्त के शुरुआत में ही उत्तराखंड में भूकम्प की आशंका जताई थी। क्योंकि इससे पहले 13 अप्रैल को बागेश्वर जिले में भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 3.6 मैग्नाट्यूट आंकी गई। बता दें कि प्रदेश का बागेश्वर जिला जोन फाइव में आता है और भूकंप की दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है। भूकंप का केंद्र बागेश्वर ही बताया गया। इसकी गहराई पांच किमी दूर मापी गई थी।

इसके बा इसी साल 21 अप्रैल को चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे, जिसका केंद्र चमोली जिला रहा। भूकंप की तीव्रता 3.3 और गहराई पांच किमी मापी गई है। इसका केंद्र चमोली बताया गया। चमोली जिला भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। इससे पहले भी यहां कई बार भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं।

मंगलवार को उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में शाम को भूकंप के झटके महसूस किए गए। इसकी रिक्टर पैमाने पर तीव्रता 3.4 मापी गई है। झटके महसूस होते ही लोग घरों से बाहर निकल आए। आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल ने बताया कि जिले में नुकसान की कोई सूचना नहीं है। बताया जा रहा है कि भूकंप का केंद्र टिहरी जिले में था।

उत्तराखंड भूकम्प के लिहाज से बहुत संवेदनशील राज्यों में से एक है। टिहरी बांध के निर्माण से पूर्व हुए आंदोलनों में यह भी एक मुख्य वजह थी कि टिहरी का क्षेत्र भूकम्प की लिहाज से बहुत संवेदनशील है। अगर कभी कोई अनहोनी हुई तो इससे मैदानी इलाको को भी बहुत नुकसान होने की आशंका जताई गई थी।