आफत की बारिश,बागेश्वर जिले में 14, अल्मोड़ा में 01, चंपावत और नैनीताल जिले में 06 सड़कें बंद पड़ी हैं।पिथौरागढ़ जिले में बारिश से बॉर्डर की दो सड़कों समेत 26 मोटर मार्ग बंद पड़े हैं। सेरा में बुधवार देर रात एक मकान भरभराकर जमींदोज हो गया। उमरगड़ा में भी एक घर क्षतिग्रस्त हुआ है। सड़कें बंद होने से लोगों के लिए दैनिक जरूरतों का सामान जुटाना मुश्किल हो गया है। इधर, रामनगर क्षेत्र में बृहस्पतिवार को धनगढ़ी नाला उफान पर आ गया। 

इस दौरान नाले में फंसी एक खाली कार बह गई। गनीमत रही कि वाहन में सवार सभी छह यात्री पहले ही उतर गए थे। वहीं एक बाइक भी तेज बहाव में बह गई और बाइक सवार सकुशल बच गया। डीडीहाट के खेतार कन्याल में बारिश से एक दर्जन पेयजल लाइनें ध्वस्त हो गईं। यहां पांच मकान पूर्ण रूप से ध्वस्त हो गए हैं। प्रभावितों ने पड़ोसियों के वहां शरण ले रखी है। चंपावत जिले में टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर धौन-स्वांला के बाद अब बाराकोट के सिंगदा की पहाड़ी नई मुसीबत बनकर आई है। 


बृहस्पतिवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे सिंगदा के पास पहाड़ी का एक हिस्सा दरक ने से छह घंटे यातायात ठप रहा। करीब 11:30 बजे एनएच से मलबा हटाया जा सका। लगातार हो रही बारिश से बागेश्वर जिले में चिड़ंग गांव में एक मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त जबकि शौचालय ध्वस्त हो गया। बुधवार की शाम को 11 केवी की लाइन के कई पोल भूस्खलन से ढहने से 24 गांवों की बिजली आपूर्ति बाधित हो गई है। 


पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश से जन-जीवन खासा प्रभावित है। कुमाऊं के पर्वतीय क्षेत्रों में हो रही भारी बारिश लोगों के लिए आफत बनती जा रही है। वही गढ़वाल क्षेत्र में चार धाम यात्रा की सड़कों समेत कई स्तानीय रास्ते भी भूस्खलन की भेंट चढ़ गए हैं। इस साल चमोली व रुद्रप्रयाग जिले में मौसम ने काफी तबाही मचाई है। रुक-रुक के हो रही बारिश से हो रहे भूस्खलन और बादल फटने जैसी घटनाओं मे अब तक कई लोग मौत के मुँह में समा गए हैं। मौसम विभाग की माने तो बरसात जुलाई भर चलने के आसार हैं। पहाड़ो पर लगातार हो रही बारिश से मैदानी भागों में नदियाँ खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। नदियों का बढ़ता जल स्तर देखकर प्रशासन हाई अलर्ट पर है। यदि बरसात नही रूकी तो मैदानी भागों में नदी के आस पास वाले क्षेत्रों में बढ़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।