उत्तराखंड छात्र संगठन (यूएसएफ) ने महाविद्यालयों में वार्षिक परीक्षा करवाने का विरोध किया है। कहा कि कोरोना संक्त्रमण काल में सेमेस्टर प्रणाली वाले विद्यार्थियों को प्रोन्नत कर दिया गया। जबकि विरोध के बावजूद यहा वार्षिक परीक्षा प्रणाली लागू कर दी गई। विद्यार्थियों को जिसका खामियाजा इस संकट की घड़ी में भुगतना पड़ रहा है। संगठन ने वार्षिक परीक्षाओं को रद्द कर सीधे प्रोन्नत करने की आवाज बुलंद की है। ऐसा न होने की स्थिति में आदोलन की चेतावनी दी है।

उत्तराखंड छात्र संगठन ने गुरुवार को महाविद्यालय के प्राचार्य के माध्यम से उच्च शिक्षामंत्री को ज्ञापन भेजा। जिसमें विश्वविद्यालय द्वारा वार्षिक परीक्षाएं करवाने का विरोध किया। कहा कि कोरोना संक्त्रमण के कारण वाहनों की कमी और मनमाना किराया विद्यार्थियों के लिए परेशानी का सबब बने हैं। कोरोना संक्त्रमण का खतरा अलग से। ऑनलाइन परीक्षा के लिए स्मार्ट फोन न होना, गावों में नेटवर्क का अभाव जैसी कई दिक्कतें हैं।


ऐसे में वार्षिक परीक्षाएं करवाना बिल्कुल भी व्यवहारिक नहीं। दलील दी कि सेमेस्टर प्रणाली वाले विद्यार्थियों को तो प्रोन्नत कर दिया गया। परंतु वार्षिक परीक्षा प्रणाली वालों के लिए दोहरा मापदंड अपनाया जा रहा। जिसे बर्दास्त नहीं किया जाएगा। कहा कि एक सूत्रीय माग पर अमल न होने की स्थिति में छात्र आदोलन के लिए बाध्य होंगे। ज्ञापन देने वालों में छात्रसंघ उपाध्यक्ष राहुल उपाध्याय, सचिव अरविंद नेगी, जगमोहन, नीरज, पंकज पपनै आदि शामिल रहे।