24 अगस्त को NIT श्रीनगर का भूमि पूजन, NIT नही जाएगा राज्य से बाहर ।



लंबे समय से विवादों में घिरी NIT श्रीनगर को आखिरकार भूमिपूजन का दिन मिल ही गया, भले अस्थायी ही सही। दरअसल रमेश पोखरियाल के मुख्यमंत्री रहते ही NIT को सुमाड़ी के लिए लाया गया था। इसमें कोई सन्देह भी नही है कि NIT आज तक अगर राज्य में है तो उसके पीछे भी पोखरियाल का ही हाथ है। हजार विवादों के बाद भी पोखरियाल इस दिशा में कार्यरत हैं की किसी भी प्रकार से NIT को सुमाड़ी में ही बानाया जाए और क्षेत्र का विकास हो। फिर उसके लिए अगर कोई भी कीमत चुकानी पड़े तो चुकाओ ।केंद्रीय शिक्षा मंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक 24 अगस्त को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) उत्तराखंड के अस्थायी कैंपस का ऑनलाइन शिलान्यास एवं भूमि पूजन करेंगे। जबकि श्रीनगर में प्रदेश के उच्च शिक्षा एवं राज्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत बतौर विशिष्ट अतिथि कार्यक्रम स्थल पर मौजूद रहेंगे। 

सुमाड़ी में स्थायी परिसर का निर्माण होने के बाद यह परिसर ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर सस्टेनेबल हिमालय’ में बदल जाएगा। जहां एनआईटी अन्य संस्थानों के साथ मिलकर हिमालय के विकास पर काम करेगी। वर्ष 2009-10 से एनआईटी उत्तराखंड भक्तियाना स्थित आईटीआई और पॉलीटेक्निक की भूमि में संचालित हो रहा है। जबकि संसाधनों के अभाव में संस्थान की कक्षाएं पिछले दो साल से एनआईटी जयपुर में संचालित हो रही हैं। 

लगभग 900 करोड़ की लागत से स्थायी परिसर का निर्माण सुमाड़ी में होना है, लेकिन जब तक स्थायी परिसर का निर्माण होता है, तब तक भक्तियाना में आईटीआई और रेशम फार्म की भूमि में अस्थायी परिसर का विस्तारीकरण किया जाना है। शिक्षा मंत्रालय ने विस्तारीकरण के लिए 78.81 करोड़ रुपये मंजूर किए हुए हैं। एनआईटी के निदेशक प्रो. श्यामलाल सोनी ने बताया कि सोमवार (24 अगस्त) को मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री डा. निशंक दिल्ली से ही वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अस्थायी परिसर के शिलान्यास एवं भूमि पूजन में शामिल होंगे। अब कार्यदायी संस्था काम शुरू कर देगी। यहां हॉस्टल, पुस्तकालय, लैब और अन्य भवनों का स्थायी निर्माण होगा। 


डॉ निशंख का साफ कहना है कि स्थायी कैंपस तो सुमाड़ी में ही बनेगा क्योंकि उसके लिए पहले से भूमि आवंटित है। अब तक किन्हीं कारणों से भले NIT सुमाड़ी में न बन सकी हो लेकिन हमारा पूरा प्रयास की सुमाड़ी में भवन निर्माण के साथ साथ मूलभूत सुविधाओ की जरूरतों को पूरा किया जाए। आपको बता दें कि कुछ समय पहले ही माननीय कोर्ट ने राज्य सरकार से पूरे मामले पर जवाब मांगते हुए, सड़क दुर्घटना में घायल छात्रा को 25 लाख मुवावजा देने की बात कही थी। कोर्ट में दायर याचिका में याचिका कर्ता पूर्व छात्र ने कहा था कि राज्य व केंद्र सरकार में सही तालमेल न होने के कारण कैंपस बनने में अर्चन आ रही है। जिसका खामयाजा छात्र भुगत रहे हैं।

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