जनता को लूटो और मजे करो, यही हो रहा है बीजेपी के कार्यकाल में, सरकार में रुपये के गिरते स्तर को लेकर आए थे और आज तेल की बढ़ती हुई कीमतों को रुपये की गिरावट को ही जम्मेदार मान रहें है। कोरोना काल में पूरे विश्व में तेल सस्ता हुआ लेकिन सिर्फ भारत ही एक ऐसा देश है जहां तेल की कीमतें एकाएक बढ़ती रही। खैर भारत की जनता बहुत समझदार है। दूसरे के चूल्हे पर पानी पड़ा देखकर ही खुश होती है। पेट्रोल के दाम का ग्राफ एक बार फिर ऊपर चढ़ने लगा है। पिछले 15 दिन में दून में पेट्रोल एक रुपये 25 पैसे महंगा हुआ है। राहत इस बात का है कि डीजल के दाम करीब दो माह से स्थिर हैं। दून में डीजल 74.19 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है।


कोरोनाकाल में आम आदमी पहले ही महंगाई और बेरोजगारी से परेशान हैं। उस पर ईंधन की बढ़ती कीमतें कंगाली में आटा गीला करने का काम कर रही हैं। मई महीन में अनलॉक का पहला चरण शुरू होने के साथ ही पेट्रोल-डीजल के दाम में उछाल आना शुरू हो गया था। यह क्रम करीब डेढ़ माह तक जारी रहा। इसके बाद 15 अगस्त से फिर पेट्रोल की कीमतों में इजाफा होना शुरू हुआ, जो बदस्तूर जारी है। 15 अगस्त को दून में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 81.67 रुपये थी, जो 30 अगस्त को 82.92 रुपये तक पहुंच गई।


देहरादून पेट्रोल पंप वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव सचिन गुप्ता के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के मुकाबले रुपये की घट रही कीमत को पेट्रोल के दाम बढ़ने का सबसे बड़ा कारण बताया जा रहा है। इसके अलावा देश में अभी पेट्रोल-डीजल की खपत सामान्य दिनों की बराबरी पर नहीं पहुंच पाई है। इस कारण भी दाम बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि अभी कुछ समय तक यह बढ़ोतरी जारी रहने की आशंका है।