कोरोना काल में उत्तराखंड पुलिस लोगों की हर अम्भव मदद कर रही है। हर चौराहे नुक्कड़ पर खड़ी पुलिस लोगों से मित्रता पूर्वक मास्क पहनकर चलने की गुजारिश भी कर रही है। आवश्यक कार्यों के लिए ही घरों से निकलने का अनुरोध करते करते पुलिस थक गई है, लेकिन कुछ लोग हैं जो अपनी हरकतों से बाज नही आ रहे हैं। 


आपको बता दें कि प्रदेश में मास्क पहन कर न चलने पर चालन शुल्क एक हजार तक हो चुका है। भले एक हजार शुल्क तीसरी बार पकड़े जाने पर वसूला जा रहा हो, लेकिन ये अब जनता की सुरक्षा के लिए ही किया जा रहा है। कुछ लोग फिर भी अपनी हरकतों से मजबूर है और उनके लिए नियम कानून को पालन करने में दिक्कतें आ रही हैं। बेवजह सड़कों पर निकलना, मास्क नही पहनना और झुंड में चलना जैसे उनकी मजबूरी हो । पुलिस समझा समझा के थक गई लेकिन लोग हैं कि मानने को तैयार नही । 


अब पुलिस ने मित्रता का भाव त्यागने की ठान ली है। पिछले सप्ताह रविवार को पुलिस ने रविवार बन्द का पालन न करने वाले दुकानदारों का देहरादून में चालान किया। और अब सड़कों पर बेवजह निकलने वालों की भी खैर नही। पहले हाथ जोड़कर विनती करने वाले अब हाथों में लठ लिए खड़े हैं। अगर नियमों की अनदेखी हुई तो पुलिस लठ भांजने से भी परहेज नही करेगी। पुलिस " अहिंसा परम् धर्मों" को छोड़कर "हिंसा परम् आवश्यक" को अपनाने के लिए मजबूर हो गई है। राज्य में कोरोना लगातार पैर पसार रहा है। स्थिति दिन ब दिन बिगड़ती ही जा रही है। कोरोना संक्रमितों की संख्या में तेजी से हो रही वृद्धि ने शासन/प्रशासन की नींद उड़ा रखी है। संक्रमण के लिए कहीं न कहीं लोग भी जिम्मेदार हैं क्योंकि बेवजह के कार्यों पर रोक न होने से संक्रमण के बढ़ने का खतरा कई गुना बढ़ गया है। यही वजह है कि अब उत्तराखंड पुलिस चुन-चुन कर सुतन के मूड में नजर आ रही है।