प्रदेश में पब्जी गेम खलने से होने वाली आत्महत्याओं में ये पिछले दो माह में तीसरी-चौथी घटना है। इससे पहले देहरादून के एक युवक ने भी रात भर पब्जी खेलने के बाद आत्महत्या कर ली थी। हरिद्वार सिडकुल थाना क्षेत्र की महादेवपुरम कॉलोनी में पब्जी गेम खेल रहे दो युवकों ने जहरीला पदार्थ खाकर जान दे दी। पुलिस ने दोनों के मोबाइल कब्जे में लेकर फोरेंसिक जांच को भेज दिए हैं। मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। 


एक ही कमरे रहते थे चारों दोस्त:- पुलिस के मुताबिक, सिडकुल की अलग-अलग औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले ऋषभ शर्मा, आशीष त्यागी, दिनेश कुमार सभी निवासी पंजाबी बाग, सहारनपुर (उप्र) और दीपक निवासी यमुनानगर (हरियाणा) ने महादेवपुरम कॉलोनी में कमरा किराए पर लिया हुआ था। एक ही कमरे में रहने वाले चारों दोस्त बुधवार रात नौ बजे खाना खाने के बाद छत पर टहलने चले गए। बताया जाता है कि 10 बजे सभी छत से उतरकर कमरे में आ गए। इसके कुछ ही देर बाद ऋषभ और दीपक मोबाइल पर पब्जी गेम खेलने लगे, जबकि दिनेश और आशीष सो गए। 

देर रात तक चल रहा था खेल:- दिनेश और आशीष ने पुलिस को बताया है कि ऋषभ और दीपक बुधवार की देर रात करीब डेढ़ बजे तक पब्जी गेम खेलते रहे। रात करीब ढाई बजे ऋषभ और दीपक अचानक दर्द से तड़पने लगे। नींद खुली तो दोनों के पास ही जहरीला पदार्थ पड़ा था। उन्होंने घटना की सूचना पुलिस को दी। सिडकुल थाना प्रभारी लखपत सिंह बुटोला तत्काल मौके पर पहुंचे। पुलिस के पहुंचने से पहले ऋषभ की मौत हो चुकी थी, जबकि दीपक ने अस्पताल ले जाते रास्ते में दम तोड़ दिया। दोनों के शव पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिए गए हैं। थाना प्रभारी ने बताया कि ऋषभ और दीपक के मोबाइल जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजे जा रहे हैं। मौके से जहरीला पदार्थ मिला है। जांच पड़ताल के बाद कारणों का पता लग पाएगा। 

बढ़ते हुए आत्महत्या के मामलों को देखते हुए बीच में पब्जी पर प्रतिबंध की मांग उठी थी लेकिन कुछ लोगों का कहना था कि पब्जी में आत्महत्या के लिए उगसाने जैसा या प्रेरित करने जैसा कुछ नही है। पब्जी कुछ कुछ IGI जैसा ही खेल है बस इसमें मल्टीप्लेयर विकल्प होने से खेल और भी रोमांचकारी हो जाता है। दूसरा एप्लीकेशन ऑनलाइन माध्यम से चल सकता है और मोबाइल फोन में आसानी से खेल जा सकता है। जबकि IGI को फोन में नही खेला जा सकता था। आत्महत्या की वजह मानसिक तनाव भी हो सकता है। या कोई दूसरी वजह भी हो सकती है। अधिक फोन चलने से भी व्यक्ति मानसिक तनाव का शिकार हो सकता है, ऐसे कई शोध सामने आए हैं।