पिछले वर्ष तीन बच्चों को लेकर काफी गहमा गहमी रही। बहुत सी ग्राम सभावों में इसको लेकर काफी विवाद भी हुआ। लेकिन अब सरकार ने इस मामले पर राहत देते हुए तीन बच्चों की गाइडलाइन साफ कर दी है। 25 जुलाई 2019 के बाद तीसरा बच्चा पैदा होने पर ग्राम प्रधान का चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। चुनावी आहट के बीच उम्मीदवारों के लगातार आ रहे फोन के चलते जिला पंचायत राज अधिकारी आरसी त्रिपाठी ने यह जानकारी दी है। इसके अलावा उन्होंने उम्मीदवारों की शैक्षिक योग्यता को लेकर भी स्थिति साफ कर दी है।

जिले में पंचायत चुनाव को लेकर जिला प्रशासन की ओर से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। एक सितंबर से पंचायतों की पुनर्गठन और परिसीमन प्रक्रिया शुरू हो जाएगी जो 27 अक्टूबर तक पूरी होगी। इसके बाद नवंबर में क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत का परिसीमन और पुनर्गठन कर लिया जाएगा। ऐसे में पंचायत चुनाव को लेकर गांव-गांव में सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इन सबके बीच कई उम्मीदवार चुनाव लड़ने से संबंधित योग्यताओं को लेकर असमंजस की स्थिति में थे। जिसका निदान अब हो चुका है।

जिला पंचायत राज अधिकारी आरसी त्रिपाठी ने बताया कि क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत सदस्य को लेकर हाईकोर्ट ने कानून पर कोई निर्णय नहीं दिया है, इसलिए इनमें दो बच्चों से अधिक होने वालों के चुनाव लड़ने पर रोक रहेगी, बच्चे चाहे कभी भी पैदा हुए हों। इसके अलावा सामान्य व अन्य पिछड़ा वर्ग के पुरुष को त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव लड़ने के लिए कम से कम दसवीं पास होना जरूरी होगा, जबकि किसी भी वर्ग की महिला के साथ ही अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के ग्रामीणों के लिए शैक्षिक योग्यता आठवीं पास निर्धारित की गई है।