राज्य में रोजगार की स्थिति को लेकर किसी के पास कोई विज़न नही है। पक्ष विपक्ष एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप करते रहते हैं। अब पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत अब उत्तराखंड के बेरेाजगार युवाओं के मुद्दों को लेकर निर्णायक लड़ाई छेड़ेंगे। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के हितों की लड़ाई लड़ना उनका कर्तव्य है। यह राजनीतिक लड़ाई नहीं, बल्कि आर्थिक संकट से घिरे समाज के हर तबके के जीवनयापन का सवाल है। रावत ने रविवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिग के जरिये बेरोजगारों से चर्चा के दौरान यह बात कही। उन्होंने कहा कि बेरोजगारों के समर्थन में वह एक सितंबर को उपवास रखेंगे।

हरीश रावत ने कहा कि प्रदेश में बेरोजगारी के खिलाफ सरकार के पास कोई ठोस नीति नहीं है। रावत ने कहा कि उनके कार्यकाल में 32 हजार से अधिक पदों को भरा गया था, लेकिन पिछले तीन-चार वर्षाें में युवा रोजगार की विज्ञप्ति तक देखने को तरस गए हैं। इसके साथ ही स्वरोजगार के लिए ऋण मिलने में आ रही जटिलताओं के कारण बेरोजगारों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है।रावत ने फॉरेस्ट गार्ड भर्ती में अनियमितता व जूनियर इंजीनियर के पदों में भर्ती का मामला भी बेरोजगारों ने प्रमुखता से उठाया। कुछ युवाओं ने गैरसैंण के मुद्दे पर कहा कि सचिवालय का गैरसैंण में बनना ही इसका एकमात्र समाधान है। आइटी सेक्टर से जुड़े युवाओं के अलावा बीएड, टीईटी प्रशिक्षित बेरोजगारों ने भी अपनी समस्याएं रखीं। पूर्व मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि बेरोजगारी की समस्या को वह स्वयं प्रदेश सरकार के समक्ष प्रमुखता से रखेंगे।