बागेश्वर जिले के भेड़ पालकों के लिए सरकार ने दी सौगात । विभाग ने कोरोना काल में बेरोजगारी से जूझ रहे भेड़ पालकों को अच्छी खबर दी है। शामा और कर्मी में आस्ट्रेलियन मेरिनो भेड़ें पहुंच गई हैं। एक भेड़ की कीमत करीब तीन लाख रुपये बताई जा रही है। इन भेड़ों की ऊन से विशेष गुणवत्ता का पश्मीना बनाया जाता है। यह करीब सौ किलोग्राम तक वजनी भी होती हैं। जिससे भेड़ पालकों की आर्थिकी में सुधार होगा। इतना ही नहीं भेड़ नस्ल सुधार पर भी पशुपालन विभाग काम करेगा।


शामा और कर्मी क्षेत्र में भेड़ पालन का कार्य किया जाता है। भेड़ों की नस्ल सुधार और ऊन उत्पादन बढ़ाने के लिए यहां छह भेड़ आस्ट्रेलिया से आयात की गई हैं। इन भेड़ों से जहां उच्च गुणवत्ता की ऊन प्राप्त होगी, वहीं मात्रा में भी वृद्धि होगी। जिससे किसानों की आर्थिक विकास में वृद्धि होगी। इन भेड़ों से प्राप्त होने वाली ऊन से विदेशी ऊन पर आत्मनिर्भरता कम होगी। देश में 95 प्रतिशत ऊन का आयात ऑस्ट्रेलियन मेरिनों का होता है।


ऑस्ट्रेलिया से आयातित मेरिनों भेड़ से राज्य के भेड़ पालकों को उच्च गुणवत्ता के नर मेढ़ें उपलब्ध होगें। इस भेड़ की खासियत होती है कि इसकी ऊन काफी बेहतर किस्म की मानी जाती है और महंगी ऊनों में शामिल होती है। इसकी कीमत बाजार में डेढ़ सौ रुपये से शुरु होती है। कम माइक्रोन की ऊन की और बेहतर कीमत मिलती है। एक साल में एक भेड़ 200 किलो तक ऊन देती है। इसके बनाए कपड़ों की भी बाजार में बेहतर कीमत मिलती है।