उत्तराखंड में सरकारी व निजी बसें कोरोना की भेंट चढ़ गई। नौबत ये आ गई है कि मालिक गाड़ियों का टैक्स चुकाने तक पैसा नही जुटा पा रहे हैं। उत्तराखंड सरकार का खुद का परिवहन निगम भी इतना बेहाल है कि कर्मचारियों के वेतन के लिए भी पैसा का प्रबन्ध नही हो पा रहा है। वैश्विक कोरोना महामारी के कारण उत्तराखंड परिवहन कारोबार को हुई आर्थिक हानि से उबारने के संबंध में आज संयुक्त रोटेशन यात्रा व्यवस्था समिति के नेतृत्व में परिवहन व्यवसायियों ने विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल को तीन सूत्री मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। समस्या पर कारवाई करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने परिवहन व्यवसायियों की 3 सूत्रीय मांग को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखा। साथ ही परिवहन से जुड़े सभी लोगों को आश्वस्त करते हुए कहा कि वह जल्द ही इस संबंध में मुख्यमंत्री से चर्चा वार्ता कर समस्या का समाधान निकालेंगे। 

उत्तराखंड परिवहन के अंतर्गत भी बहुत सी बसें निजी तौर पर चल रही हैं। देहरादून-ऋषिकेश, देहरादून-हरिद्वार और AC बसें से समेत कई बसों के मालिक भी कोरोना काल में बसों का टैक्स नही चुका पा रहें हैं। परिवहन मालिकों ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र के माध्यम से बैराज स्थित कैंप कार्यालय में विधानसभा अध्यक्ष को अपनी विभिन्न समस्याओं से अवगत करते हुए ज्ञापन सौंपा। जिसमें कोविड-19 के कारण प्रदेश में पर्यटन और परिवहन व्यवसाय पर सबसे ज्यादा असर की बात करते हुए कहा गया कि उनकी स्थिति बद से बदतर होती जा रही है जिससे परिवार का पालन पोषण करना आज के समय में मुश्किल हो गया है। परिवहन व्यवसायियों द्वारा सरकार से इस स्थिति से उबरने के लिए ऐसी ठोस नीति बनाए जाने का अनुरोध किया गया है, जिससे वाहन स्वामी वापस मुख्यधारा से जुड़कर अपना जीवन निर्वहन कर सकें।

ज्ञापन में बताया गया कि सरकार द्वारा वाहन मालिकों का 3 माह का ही टैक्स माफ किया गया व चालक एवं परिचालकों को एक-एक हजार की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई जो कि नाकाफी है। परिवहन व्यवसायियों द्वारा विधानसभा अध्यक्ष को दिए गए ज्ञापन में 3 सूत्रीय मांग रखी गई। इस अवसर पर संयुक्त रोटेशन यात्रा व्यवस्था समिति के अध्यक्ष सुधीर राय ने कमर्शियल वाहनों के समस्त चालक परिचालकों को कम से कम 10 से 15 हजार रुपये की आर्थिक सहायता राशि उपलब्ध कराने, समस्त कमर्शियल वाहनों का टैक्स कम से कम 2 वर्ष के लिए माफ किए जाने एवं वर्तमान वर्ष 2020 को शून्य सत्र घोषित कर 31 मार्च 2020 से पूर्व पंजीकृत सभी कमर्शियल वाहनों की आयु सीमा 2 वर्ष के लिए बढ़ाने की मांग की गई।