हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी गांव को न्याय नही मिला, पानी के खौफ में जीने को मजबूर है गांव ।



ऋषिकेश,भोगपुर के दावड़ा गांव में जिला प्रशासन पानी की निकासी नहीं करा पाया है। जबकि ग्रामीणों की याचिका पर हाईकोर्ट पहले ही सम्बन्धित विभाग को आदेश जारी कर चुका है। ग्रामीण महिला का आरोप है कि, खानापूर्ति के लिए थोड़ी बहुत कारवाई जरूर की, लेकिन ये नाकाफी साबित हुई। पीड़ित महिला ने कहा है कि प्रशासन राजनीतिक दबाव में काम का रहा है। उनका कहना है की कारवाई के बाद भी उन्होने कई बार अधिकारियों के दर पर चक्कर भी लगाए, लेकिन किसी ने नही सुनी । 


सहायक अभियंता सिंचाई विभाग ऋषिकेश,अनुभव नौटियाल का कहना है कि सिंचाई विभाग की ओर से महादेव खाला में बने चैकडेम की सफाई की गई। जिससे इस साल किसी प्रकार का मलबा दावड़ा गांव में नहीं आया। नक्शे में भी महादेव खाला दावड़ा गांव में ही खत्म होता दिख रहा है। पानी की निकासी को लेकर एक प्रोजेक्ट का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है। वित्तीय स्वीकृति मिलते ही काम शुरू किया जाएगा। इससे पानी की निकासी की समस्या खत्म हो जाएगी। 


भोगपुर के दावड़ा गांव में महादेव खाला हर साल कहर बरपा जाता है। खाले में मिट्टी, पत्थर और पानी बहकर आने से यह मलबा लोगों के घरों में घुस जाता है। जब यह सिलसिला जारी रहा, और स्थानीय अधिकारियों ने पानी की निकासी को लेकर कोई इंतजाम नहीं किया तो दाबड़ा निवासी महिला शकुंतला सिंह ने पिछले साल हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर महादेवखाले पर हुए अतिक्रमण हटाने और खाले को पुराने स्वरूप में लाने की मांग की। फरवरी 2020 में हाईकोर्ट के आदेश पर ऋषिकेश के तत्कालीन उपजिलाधिकारी प्रेमलाल के नेतृत्व में खाले पर हुए अतिक्रमण को तोड़ा था। शकुंतला देवी का कहना था कि हाईकोर्ट ने आदेश किया था कि नाले की सफाई कर चेक डेम लगाकर मलबे को रोका जाए और नाले की निकासी पूर्व की भांति की जाए। लेकिन प्रशासन की ओर से अतिक्रमण हटाने की जो कार्रवाई की गई वह भेदभाव पूर्ण थी, गरीबों के अतिक्रमण ढहा दिए गए, राजनीतिक रसूखदारों के अतिक्रमण को छेड़ा नहीं गया। उन्होंने बताया कि 80 के दशक से पहले महादेव खाले का पानी सीधे राजकीय इंटर कॉलेज रानीपोखरी के पास में जाता था, 80 के दशक में जमीनों की बिक्री होने के बाद बिल्डरों ने इस नाले को पाट दिया। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन की ओर से जो कारवाई की गई वह नाकाफी है। अतिक्रमण को पूरी तरह ध्वस्त कर खाले को उसके स्वरुप में लाया जाए। बरसाती पानी की निकासी सीधे राजकीय इंटर कॉलेज के पास वाले में खाले में किया जाए। इस खाले में जहां जहां अतिक्रमण हो उसे भी ध्वस्त किया जाए। उन्होंने बताया कि यदि प्रशासन की ओर से पानी की निकासी का इंतजाम नहीं किया जाता है तो वह हाईकोर्ट के आदेश की आवमानना को लेकर फिर याचिका करेंगे।

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