आप कितने सुगम में हैं, दुर्गम की परिभाषा क्या है ? इस खबर से स्पष्ट हो जाएगा ।

 




उत्तराखंड के पहाड़ो में जब आपदा शब्द का जिक्र होता है, तो समझ जाइये की स्थिति विकट है। लेकिन उत्तराखंड में ही कुछ गाँव ऐसे भी हैं जहां जीवन की परिभाषा सिर्फ संघर्ष ही है। उनके लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क जैसी मूलभूत सविधाओं का अभवा भी किसी आपदा से कम नही है। और इस आपदा से दिन रात लड़ता है वहाँ का स्थानीय निवासी। आज एक ऐसी ही घटना सुर्खियों में बनी हुई है । जहाँ एक सेना (ITBP) का जवान 40 किलोमीटर का सफर, 15 घण्टों में एक मरीज के साथ पैदल चलकर उसको हस्पताल पहुंचा है। जवान की तो नेता जी ने तारीफ जरूर की लेकिन बदहाल व्यवस्थाओं के बारे में कुछ नही कहा । आजादी के 73-74 साल बीत जाने के बाद भी ऐसी स्थिति अगर है, तो किसी को अपने कर्तव्यों का बोध बस साबासी देने में ही नजर आता है, जबकि एक जवान है जिसको दर्द नजर आता है और वो 40 किलोमीटर पैदल चलने के ठान लेता है। न कहीं रास्ता सही है, न सड़क है। फिर भी पत्थरों पर 40 किलोमीटर पैदल वो भी संग स्ट्रेचर पर मरीज, इंसानियत यही होती है न कि भाषण देना। 


उत्तराखंड में तैनात भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) ने सेवा परमो धर्म: के मंत्र को चरितार्थ किया है। ITBP जवानों ने 40 किलोमीटर पैदल चलकर एक घायल महिला को अस्पताल पहुंचाया है। इस दौरान ये जवान महिला को स्ट्रेचर पर लेकर उफनाते नदी-नालों को पार करके अस्पताल तक पहुंचे, जिससे महिला को इलाज मिल सका। 14वीं बटैलियन के जवानों ने महिला को शनिवार को मुनस्यारी में सड़क किनारे तक पहुंचाया, जहां से फिर उसे अस्पताल पहुंचाया गया। महिला का उपचार किया जा रहा है और उसकी हालत स्थिर बनी हुई है। जवान ने इस पूरी घटना का एक वीडियो ट्विटर पर शेयर किया है। सलाम है ऐसे जवान को, ऐसा हौसला आज बहुत कम ही लोगों में बचा हुआ है, कि दुर्गम स्थानों पर ऐसी सेवा दे सकें। 


खबर पर केंद्रीय मंत्री की प्रतिक्रिया आई लेकिन राज्य का एक भी मंत्री नही बोला। जानते हैं क्यों ? क्योंकि इन सब का जिम्मेदार राज्य का ही मंत्री है। जिन्होंने अपनी झोलियाँ तो खूब भरी लेकिन सन 2000 से अलग राज्य बनने के बाद भी लोगों को उत्तर प्रदेश संचालित व्यवस्थाओं पर ही छोड़ दिया। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने आईटीबीपी के जवानों के इस हौसले और कर्तव्यनिष्ठा को नमन किया है। उन्होंने कहा है कि उत्तराखंड में एक घायल महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए आईटीबीपी जवानों ने 'शौर्य - दृढ़ता- कर्म निष्ठा' को चरितार्थ करते हुए यह साबित कर दिया है कि वे केवल सीमा ही नहीं, अपितु देश के नागरिकों के भी प्रहरी हैं। 


सवाल तो पूछे जाएंगे, आज नही तो कल ।।

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