केदारनाथ आपदा अपने साथ बहुत से जख्म लेकर आई, जो आज भी हरे के हरे हैं। सरकारें झूठे दावे करती रही और लोग ऐसे घरों में शरण लेने को मजबूर रहे जिनमे दरारें पड़ी हुई है। एक ऐसी ही तस्वीर और रिपोर्ट पाठकों के साथ "पहाड़ समीक्षा" साँझा कर रहा है। चमोली जिले में वर्ष 2013 की आपदा के बाद भले ही सरकारों ने पुर्नवास और आपदा पीड़ितों को राहत देने के नाम पर बड़े-बड़े दावे किए हैं। लेकिन चमोली जिला मुख्यालय से लगी ग्राम पंचायत हरमनी के पोल गांव के ग्रामीणों के लिये वर्षों बाद भी सरकारी दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। वर्तमान तक गांव के पुर्नवास को लेकर कोई कार्रवाई न होने के चलते यहां गांव के 25 परिवार आज भी अपने दरके घरों में जिंदगी की जुगत में जुटे हुए हैं। लेकिन वर्तमान तक इस गांव के लिये शासन और प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्य योजना नहीं बनाई जा सकी है।

चमोली जिला मुख्यालय गोपेश्वर से महज 15 किमी की दूरी पर स्थित ग्राम पंचायत हरमनी के पोल तोक में वर्ष 2013 की आपदा के दौरान भूस्खलन शुरु हो गया था। जिससे यहां बने घरों पर दरारें पड़ने लगी थी। जिसके बाद ग्रामीणों की ओर से सूचना मिलने पर तहसील प्रशासन की ओर से गांव का निरीक्षण किया गया और भूगर्भीय सर्वेक्षण के बाद गांव को पुर्नवास की सूची में शामिल कर दिया गया। लेकिन पुर्नवास की सूची में शामिल होने के बाद यहां निवास कर रहे 25 परिवारों के पुर्नवास को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी। ऐसे में ग्रामीण बीते सात सालों से धीरे-धीरे घर की चौड़ी होती दरारों को सीमेंट से पाटकर जैसे-तैसे जिंदगी बसर कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जन प्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक सब से पुर्नवास को लेकर गुहार लगाई गई, लेकिन कोई कारवाई होती नजर नहीं आ रही है। ऐसे में अब अपने घरों में रहने में भी डर लग रही है। कहा कि यदि अभी सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जाती तो गांव में बड़ा हादसा हो सकता है।