राज्य को बरवाद करने का जिम्मा उठाया है त्रिवेंद्र रावत और मोदी ने, 2022 के लिए झूठे वादों की हो रही बरसात ।

 

राज्य के खस्ता हाल आज किसी से छुपे नही है। शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य सेवाएं गर्त में चली गई हैं। लेकिन बीजेपी को फिक्र है तो बस कुर्सी की । जीरो टॉलरेंस कह के सत्ता में आए थे और वन दरोगा जैसे पदों पर करोड़ों डकार गए। प्रदर्शन करने वालो पर पुसिल से लाठी चार्ज करवाया गया कि चुप रहो, बस केवल इनकी सुनो । ये झूठ पे झूठ कहते रहेंगे और जनता चुप चाप तमाशा दिखती रहे।


माननीय प्रधानमंत्री जी भी सिर्फ बोलते ही बोलते हैं और करते कुछ नही। ऑल वेदर के नाम पर पहाड़ी नागरिकों को एनिमेशन के जरिये क्या क्या सपने दिखाए गये, लेकिन उस सपने का 5% भी आज धरातल पर नही है। दुर्घटना में अब तक दर्जनों जाने चली गई सो अलग । करोड़ो के पेड़ बेच खाए, स्थिर पहाड़ों को छती पहुंचाई और अंत में कुछ नही हुआ तो ऑल वेदर को चार धाम रोड प्रोजेक्ट का नाम दे दिया। वाह ! ये अच्छा है । अब 2022 का चुनाव नजदीक है तो सहाब की बेचैनी बढ़ी हुई हैं। क्योंकि 2022 तक ही ऑल वेदर प्रोजेक्ट की डेड लाइन है और अभी तक कार्य 30% भी नही हुआ। मझेदार बात यह है कि 80% लीपापोती करने के बाद भी काम सिर्फ 30% ही हुआ है। जबकि जो जन हानी और पर्यावरण की हानी हुई उसका कोई आँकल नही किया गया है। सड़क निर्माण का कार्य आज भी खड़ी कटाई को लेकर विवादों में बना हुआ है लेकिन सहाब को अब तक याद नही आई की एक बार निरीक्षण किया जाए। अब सहाब का कहना है कि नवम्बर 2020 तक कार्य पूर्ण किया जाए, और सहाब ऑल वेदर का उदघाटन करेंगे। अरे सहाब ! गुजरात के किस स्कूल से पढ़े हो ? जो कार्य पिछले चार वर्षो में 30% लीपापोती के साथ हुआ है उसको दो माह में कैसे पूरा करें । हाँ, आपको भाइयों और बहनों को 2022 के लिए झूठे सपने बेचने आना है तो आइये। स्वागत है, राज्य में आज भी आपके और माननीय त्रिवेंद्र रावत जी के चाहने वाले बहुत हैं। जिनको शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं नही चाहिए। बस एक ऐसा व्यक्ति चाहिए जो इतनी लम्बी फेंक सके कि उसको लपेटने में पांच साल गुजर जाए। दूसरा एक ऐसा मुख्य मंत्री चाहिए जिसमे खुद का कोई विवेक न हो और वह हर बार यह कहता रहे कि, माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में देश विकास कर रहा है।

राज्य में बीते चार माह में 400 से अधिक लोगों ने आत्महत्या की लेकिन सरकार के कानों में जूं तक नही रेंगती, क्यों ? क्या आपने जानने की कोशिश की, कि आत्महत्या करने वालों में कितने लोग बेरोजगारी के चलते परेशान थे ? नही ! क्योंकि आपको तो बस कोई मुद्दा सिर्फ मुद्दा इसलिए नजर आता है, जिसमे राजनीतिक फायदा हो । आज नेता भूल गए हैं कि जनता ने उन्हें किस दायित्व से कुर्सी पर बिठाया है। अधिकांश का तो स्टेटस भी उस कुर्सी के लायक नही है फिर भी जनता ने किसी उम्मीद से बिठाया है। क्या ये भी भूल गए ? पढ़े लिखे युवाओं को सिर्फ कोचिंग सेंटरों के भरोसे छोड़ दिया गया है। चार चार साल बीत जाने पर भी राज्य में न तो पद आ रहे और न हुई परीक्षाओं पर तैनाती हो रही है। निजीकरण से किसका भला होगा ? आज बेचारा गरीब रेलवे स्टेशन पर भी नही ठहर सकता क्योंकि जहाँ मात्र 3 रुपये का स्टेशन चार्ज होता था आज वहां 50 रुपये वसूला जा रहा है। तो निजीकरण से भला किसका हुआ ? आम जनता तो शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए त्रस्त है और निजीकरण की बात करते हैं। फिर भी चले आइये क्योंकि गढ़वाली पहाड़ी नागरिक किसी गुजराती के मुँह से "भाई और बैण-बैणीयों" सुनकर ही सभी सुख सुविधाओं को प्राप्त कर लेता है।


(BDO) Block Development Officer Vacancy Uttarakhand 2020
Uttarakhand Education Department- 658 Vacancies
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