बेरोजगार युवाओं को सालभर जिन रोजगार मेलों का इंतजार रहता है उनपर भी कोरोना भारी पड़ गया है। आलम ये है कि कुमाऊं के छह जिलों में पिछले नौ माह में महज 11 रोजगार मेले लग सके हैं जो कि पिछले साल की तुलना में 85 फीसद कम है। हैरानी की बात ये है कि मंडलीय और वृहद रोजगार मेला लगने के बावजूद एक हजार युवाओं को भी रोजगार नसीब नहीं हो सका है। बागेश्वर और सीमांत जिले पिथौरागढ़ में तो एक भी रोजगार मेला नहीं लगाया जा सका है। क्षेत्रीय सेवायोजन अधिकारी, रावत ने बताया कि कोरोना संक्रमण के कारण जिलों में लक्ष्य के अनुसार रोजगार मेले नहीं लगाए जा सके हैं। भविष्य में यदि सब ठीक होगा तो वृहद और जिला स्तरीय मेलों की संख्या बढ़ाकर अधिक से अधिक युवाओं को रोजगार से जोड़ा जाएगा।


कुमाऊं के सेवायोजन कार्यालयों में वर्तमान में 1,98,757 बेरोजगार पंजीकृत हैं। सरकारी क्षेत्र में पदों की कटौती के चलते यहां के युवा रोजगार मेलों पर ही निर्भर रहते हैं। कुमाऊं में फिलहाल दो लाख बेराजगारों के मुकाबले एक हजार को भी रोजगार नहीं मिल सका है। सेवायोजन विभाग ने इस बार कुमाऊं और गढ़वाल मंडल में साल की शुरूआत में ही एक-एक मंडलीय रोजगार मेला लगाया। हल्द्वानी में आयोजित कुमाऊं मंडल के मंडलीय रोजगार मेले में रोजगार की उम्मीद में चार हजार युवाओं ने भाग लिया। लेकिन महज तीन फीसद यानि 171 युवाओं को ही रोजगार मिला। आयोजन में पिथौरागढ़, चम्पावत और नैनीताल जिले के हिस्से का छह लाख का बजट खप गया।