आमतौर पर कक्षा में गुरु और शिष्य के बीच जो सीधा संवाद होता है, इसमें एक बड़ा अंतर आ गया है। ऑनलाइन पढ़ाई के नाम पर कई स्कूलों में शिक्षकों के मात्र नोट्स ग्रुप में डालने की बात सामने आई है। कई ऐसे भी शिक्षक हैं, जो मात्र यूट्यूब या अन्य जगह के लिंक छात्रों को शेयर कर रहे हैं।

तकनीकी खामियों के चलते भी शिक्षक चाहने के बाद भी छात्रों से सीधा नहीं जुड़ पा रहे। जाहिर सी बात है, जब शिक्षकों की ओर से पढ़ाई में खानापूर्ति होगी और गुरु और शिष्य के बीच सीधा संवाद स्थापित नहीं होगा तो शिक्षा के गुणवत्ता तो गिरेगी ही। सरकारी स्कूलों के कुछ छात्रों और खुद शिक्षकों ने यह बात स्वीकारी कि सीधा संवाद न होने के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है। वहीं अलग अलग स्कूल के छात्रों का कहना है कि ऑनलाइन माध्यम से नोट्स तो प्राप्त हो रहे हैं लेकिन कई बार जब कोई सवाल ऐसा आ जाता है कि उसका जवाब शिक्षक से लेना चाहो तो फेस तो फेस संवाद नही हो पाता है जिस कारण बहुत से विषयों में दिक्कतें आ रही है।

ऐसे में क्या स्कूलों द्वारा शुल्क लिया जाना उचित है ? इस पर कुछ स्कूलों के प्रधानाचार्यों और शिक्षकों ने पहाड़ समीक्षा के साथ बातचीत में अपने विचार रखे । गांधी इंटर कॉलेज के प्राचार्य एके कौशिक ने बताया कि प्रधानाचार्य स्कूल के शिक्षक शिक्षा विभाग से आदेश मिलने के पहले से ही ऑनलाइन कक्षाएं ले रहे हैं। अपनी ओर से कोई कमी ना रहे इसके लिए भी शिक्षक पूरे प्रयास कर रहे हैं। पर कई दफा तकनीकी कारणों के चलते छात्र और शिक्षकों के बीच सीधा संवाद नहीं हो पाता। यह बात गलत नहीं कि शिक्षकों और छात्रों में सीधा संवाद ना होने के कारण पढ़ाई की गुणवत्ता गिर रही है। वहीं जीजीआइसी राजपुर रोड के प्रधानाचार्य प्रेमलता बौड़ाई ने कहा, सरकारी स्कूलों के छात्र-छात्राओं और खुद स्कूलों के पास जो तकनीकी और संसाधन वर्तमान में उपलब्ध हैं उनके हिसाब से ऑनलाइन पढ़ाई एक वैकल्पिक व्यवस्था मात्र है। ऑनलाइन पढ़ाई असल पढ़ाई का विकल्प नहीं हो सकता। पढ़ाई की गुणवत्ता बनी रहे इसके लिए छात्र और शिक्षकों के बीच सीधा संवाद होना बेहद जरूरी है।