उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित यह गाँव जहां आज तक भी कोई नेटवर्क उपलब्ध नही है, सरकारों के मुँह पर जोरदार तमाचा है। उत्तराखंड में कई सरकारें आई और गई लेकिन दूरस्थ गांव की किसी ने सुध न ली । हाँ, इन गाँवों की याद उस वक्त जरूर आती है जब चुनाव नजदीक होता है । चमोली जिले के सीमांत जोशीमठ ब्लॉक स्थित मोल्टा गांव को देख लीजिए। जहां नौनिहालों को नवीं-दसवीं की ऑनलाइन मासिक परीक्षाएं देने गांव से तीन किमी ऊपर जंगल के मध्य चंचधार नामक स्थान पर जाना पड़ रहा है, जहां नेटवर्क कैच करता है। मोल्टा गांव आज भी संचार सुविधा से महरूम है।

ऐसे में गांव के किसी व्यक्ति को यदि अपने नाते-रिश्तेदार या स्वजनों से फोन पर बात करनी हो तो उसे जंगल में एक ऊंचे टीले का रुख करना पड़ता है। इस स्थान पर बीएसएनएल का नेटवर्क उपलब्ध रहता है। इन दिनों विद्यालयों में ऑनलाइन मासिक परीक्षाएं चल रही हैं। सो, छात्र-छात्राओं को भी चंचधार की दौड़ लगानी पड़ रही है। गांव के नौनिहाल राजकीय इंटर कॉलेज पैनखंडा व गणाई में पढ़ते हैं। ग्रामीणों के अनुसार कुछ समय तक गांव में जियो व एयरटेल के सिग्नल मिलते थे, लेकिन अब यह गुजरे जमाने की बात हो गई। ग्राम प्रधान विनोद पंवार बताते हैं कि विभिन्न विद्यालयों में पढ़ने वाले नौनिहाल कोरोना संक्रमण के चलते गांव में ही रह रहे हैं। लेकिन, मोबाइल नेटवर्क न होने के कारण उन्हें ऑनलाइन पढ़ाई का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा। परीक्षा देना जरूरी है, इसलिए उन्हें जोखिम उठाकर जंगल में जाना पड़ रहा है। जंगल जो की किसी भी प्रकार से सुरक्षित नही है। उत्तराखंड में आए दिन गुलदार के हमलों की खबर आम है। ऐसे में छात्रों का जंगल में जाकर परीक्षा देना सरकारों में बैठे लोगों के लिए शर्म की बात है।