उत्तराखंड में कोरोना वायरस ने जिस तरह से पैर पसारे उसके पीछे वर्तमान सरकार की नाकामी साफ झलकती है। राज्य के मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र रावत अपने ही निर्णय से पलटने में घण्टे भर का समय भी नही लगाते है। जब समय था राज्य को कोरोना से बचाने का और बाहरी लोगों के राज्य में प्रवेश पर निर्णय लेना का तब सरकार आराम से सोई रही । उसके बाद अनलॉक-1,2,3 तक राज्य में खूब कोरोना विस्तार होने दिया गया। उत्तर प्रदेश की बसें ठूस ठूस कर लोगों को देहरादून बॉर्डर पर छोड़ती रही और वहां से लोग बिना किसी जांच के राज्य में प्रवेश पाते रहे। माननीय मुख्यमंत्री जी के पास इतना कार्य था कि उनका ध्यान इस ओर नही गया या फिर किसी अचेत अवस्था में थे।

अनलॉक-4 में राज्य की स्थिति पर किसी प्रकार का मंथन नही किया गया और जैसा केंद्र ने कहा वैसा ही नियम राज्य में लागू कर दिया गया। अनलॉक-4 में महज एक सप्ताह में ही कोरोना ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए। अचेत अवस्था में पड़ी उत्तराखंड सरकार के मुख्यमंत्री अचानक जागे और घोषणा कि, उत्तराखंड आने के लिए बॉर्डर पर कोरोना टेस्ट करवाना अनिवार्य होगा। जिसका भुगतान ₹800/- यात्री स्वयं करेगा। लेकिन महज एक-दो दिन में ही सरकार इस बात से पलट गई और कह दिया की अब उत्तराखंड आने के लिए अगले चार दिन कोरोना टेस्ट नही होगा। क्यों ? क्या उन चार दिनों में कोरोना लोगों को नही छुएगा क्या । या मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत केंद्र के निर्देशों पर काम कर रहे हैं।


राज्य में अनलॉक 4 में लगातार रिकवरी रेट गिरा है। अभी तक रिकवरी रेट बढ़ा नही है लेकिन सरकार ने नया खेल शुरू कर दिया है। हस्पतालों में कोरोना संक्रमितों को ऑक्सिजन तक नही मिल पा रहा है। कल एचटीसी हस्पताल में एक मरीज ऑक्सिजन के अभवा में तड़प तड़प के मर गया। लेकिन उसको ऑक्सिजन सिलेंडर नही मिल पाया। ऐसी ही स्थिति पहाड़ी क्षेत्र में भी बनी हुई है। अब स्थिति यह है कि मरीज को महज एक दिन या कुछ घण्टों के उपचार के बाद ही घर भेज दिया जा रहा है और उसको सरकार रिकवरी आंकड़ों में दिखा रही है। जबकि हकीकत यह है कि मरीज को संक्रमित ही घर भेजा जा रहा है और उसको होम आइसोलेट के लिए कहा जा रहा है। भाजपा शासित प्रदेशो में रिमोट कंट्रोल सरकारें चल रही हैं। केंद्र से जो बटन दबाया जाता है राज्य में उसी प्रकार से कार्य किया जाता है। उत्तराखंड, हरियाणा,हिमांचल इत्यादि राज्य में विवेकहीन मुख्यमंत्रयों के शासन से साफ है कि भाजपा को प्रजा की नही बल्कि कुर्सी की चिंता है। जब मर्जी राज्य को नम्बर एक दिखा दो। राज्य में शिक्षा,स्वास्थ्य और रोजगार गर्त में चले गये और केंद्र कभी स्वच्छता में अव्वल दिखा रहा है, कभी निर्यात में । अब यही खेल रिकवरी रेट में चल रहा है। किसी भी तरह से राज्य के मुख्यमंत्री के नकारेपन को छुपाना है चाहे उसके लिए कोई भी कीमत क्यों न चुकानी पड़ जाए।