उत्तराखंड में ग्रामीण क्षेत्रों को सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत निर्माणाधीन सड़कों में अब स्थानीय ग्रामीणों को भी रोजगार मिलेगा। श्रमिकों की कमी को देखते हुए निर्माण कार्यों में तेजी लाने के मकसद से यह कदम उठाया जा रहा है। शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हुई पीएमजीएसवाई की समीक्षा बैठक में इस संबंध में अधिकारियों को निर्देश दिए गए।


जिसमें 58 सड़कों के लिए वन भूमि हस्तांतरण से जुड़े मामलों का शीघ्र निस्तारण कराने को भी निर्देशित किया गया। प्रदेश में पीएमजीएसवाई के तहत करीब साढ़े आठ सौ सड़कें स्वीकृत हैं। इनमें से 150 पर अभी कार्य शुरू होना बाकी है, जबकि 58 सड़कें वन भूमि हस्तांतरण न होने के कारण अटकी हुई है। यही नहीं, कोरोना संकट के चलते श्रमिकों के वापस लौटने के कारण निर्माणाधीन सड़कों के कार्य की रफ्तार पर असर पड़ा है।


केंद्र सरकार ने पीएमजीएसवाई की सड़कों के निर्माण में तेजी लाने और वन भूमि से जुड़े मसलों का त्वरित गति से निस्तारण कराने के निर्देश दिए थे। यह भी साफ किया था कि अगर वन भूमि के प्रकरणों का जल्द निबटारा नहीं हुआ तो इनके बारे में विचार किया जाएगा। इस सबको देखते हुए अब शासन सक्रिय हो गया है। इसी कड़ी में शनिवार को अपर सचिव और राज्य में पीएमजीएसवाई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी उदयराज ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये योजना की समीक्षा की। उन्होंने बताया कि अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि पीएमजीएसवाई की सड़कों के कार्य में तेजी के मद्देनजर स्थानीय ग्रामीणों को भी काम पर लगाया जाए। सड़क निर्माण से जुड़े जो काम ग्रामीण कर सकते हैं, उन्हें यह दिए जाएं। इससे कार्य भी रफ्तार पकड़ेंगे और ग्रामीणों को रोजगार भी मिल सकेगा।