देश में लगातार बढ़ रही बेरोजगारी को देखते हुए युवा छात्र संगठनों ने 17 सितम्बर को प्रधानमंत्री मोदी का जन्म दिन "बेरोजगार दिवस" के रूप में मनाने का फैसला किया है। छात्र संगठन की एकता ने बेरोजगारी के नई पहल शुरू कर दी है। बीते 9 सितंबर को रात 9 बजकर 9 मिनट पर छात्रों ने घरों की लाइट बुझाकर और मोमबत्तियां जलाकर, थाली बजाकर मोदी जी से मोदी की भाषा में ही रोजगार मांगा। इस मुहिम का उत्तराखंड के बेरोजगार युवाओं ने भी साथ दिया। छात्र संगठन अब रोजगार को मौलिक अधिकार की मांग में सम्मिलित करने की दिशा में बढ़ रहे हैं।


देश में जिस प्रकार से बीते छह सालों में सरकारी नौकरियों पर सरकार ने आघात किया है और निजी कम्पनी धारकों को फायदा पहुंचाया है, उनका विरोध अब देश का बेरोजगार नौजवान युवा खुलकर कर रहा है। बीते छह सालों से "मन की बात" को झेलता आ रहा बेरोजगार युवा जब समझ गया कि ये "मन की बात" नही बल्कि "वोटों की बकवास" है तो उसी "मन की बात" पर मन की बात करने वालों को मिनटों में नकार दिया। और नकारा भी क्यों न जाए ? जब "मैं देश नही बिकने दूंगा" कहने वाला, एक एक कर सभी बहुमूल्य धरोहर बेच गया। देश में एक पढा लिखा अनपढ़ तबका जरूर आज भी निजीकरण के समर्थन में भले ही है लेकिन समझदार युवा अब जाग गया है और प्रधानमंत्री से पूछ रहा है -

भारतीय सेना में 1500 सिविल इंजीनियरिंग के पद आपने कैसे खत्म किए ? रेलवे को बेचकर आपने लाखों वेकैंसी क्यों खत्म की ? BSNL को खत्म कर jio कैसे प्रगति कर रहा है ? ONGC घाटे में और Reliance Energy & Power फायदे में कैसे ? नितिन गटकरी, अजित डोभाल और अमित शाह के पुत्र कैसे इतने ऊपर पहुंचे ? जबकि आपको तो वंशवाद पसंद नही था ? जिस मनरेगा को आपने कांग्रेस की गड्ढा खोद नीति बताया, उसी योजना में आपने उत्तर प्रदेश में एक करोड़ लोगों को रोजगार देने की बात कही, तो क्या उत्तर प्रदेश के युवा मनरेगा में फाइटर जहाज बना रहे हैं ? आपके झूठ की लिस्ट इतनी लम्बी है कि देश के सभी प्रधनमंत्रियों का कार्यकाल जोड़कर भी आपके छह सालों के झूठ से कम पड़ जाए।


09 सितम्बर को छात्र संगठनों ने एकता दिखाई तो एक ही दिन में होश ठिकाने आ गए। डेढ़ साल से रेलवे की भर्ती परीक्षा की तारीख एक ही दिन में निकल आई। छात्र neet/jee की परीक्षाओं का विरोध करते रहे कि, कोरोना काल में परीक्षाएं न करवाई जाए लेकिन छात्रों की एक न सुनी गई। और रेलवे के आवेदन किए डेढ़ साल हो गया और सरकार कह रही है कि परीक्षा कोरोना की वजह से नही हो रही है। यही हाल उत्तराखंड में भी है, समूह ग के कुछ पदों पर आवेदन को एक साल होने को आया लेकिन राज्य सरकार चुपचाप तमाशा देख रही है। 09 सितम्बर को छात्र संगठन एकता को देखते हुए त्रिवेंद्र रावत सरकार के भी पसीने निकल गए तो तुरन्त कह दिया की समूह ग की परीक्षाएं जल्द करवा दी जाएंगी।

17 सितम्बर को प्रधनमंत्रियों मोदी का जन्म दिन पूरे देश में "बेरोजगार दिवस" के रूप में मानाया जा रहा है। छात्र संगठनों ने सभी युवाओं से आवाहन किया है कि 17 सितम्बर को प्रधनमंत्रियों का झूठा वादे की कटिंग को अपनी फेसबुक प्रोफाइल पर शेयर करें। "देश नही बिकने दूंगा" वालों को याद दिलाया जाए कि आपने देश की सर्वाधिक प्रॉफिट वाली संस्थाओं को बेच दिया है। और उन संस्थाओं में आए साल जिन लाखों युवाओं को रोजगार मिलता था, उसको खत्म कर दिया है। रोजगार को "मौलिक अधिकार" बनाने में छात्र संगठनों का साथ दें। अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए उठ खड़े हों। छात्र संगठन सभी बेरोजगार युवाओं से आग्रह करता है कि 17 सितम्बर 2020 को "बेरोजगार दिवस" के रूप में मानायें ।