उत्तराखंड राज्य में अनलॉक-4 लागू होने के बाद राज्य में कोरोना संक्रमितों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। राज्य में हर दिन संक्रमितों के साथ साथ मौतों का आंकड़ा भी बढ़ता जा रहा है। उत्तराखंड के तमाम पहाड़ी जिलों में भी कोरोना संक्रमितों की संख्या में तेजी देखने को मिल रही है। राज्य में हरिद्वार, देहरादून, उधमसिंह नगर और नैनीताल जिले टॉप पर बने हुए हैं। अब कोरोना की बढ़ती हुई स्थिति को देखते हुए सरकार को फिर से नियमों में फिर बदल करने की याद आयी है।

आपको बता दें कि राज्य में मई माह तक महज 57-60 लोग कोरोना से संक्रमित थे। गढ़वाल मण्डल के पहाड़ी जिलों में कहीं कोई संक्रमित केस नही था। लेकिन सत्ता में बैठे बुद्धिजीवियों ने अन्य राज्यों से आए लोगों को बिना आइसोलेट किए ही पहाड़ो पर भेज दिया और पहाड़ी जिलों में कोरोना की शुरुआत करवा दी। इसके बाद लगातार स्थिति बिगड़ती चली गई । इतना होने पर भी सरकार की नींद नही खुली और बाहरी लोगों की आवाजाही पर कोई रोक नही लगाई गई।

अब स्थिति को बिगड़ता देख सरकार को याद आ रही है कि राज्य में आने वाले सभी लोगों का पहले राज्य सीमा पर कोरोना टेस्ट होगा और यदि रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गयी तो राज्य में प्रवेश नही मिलेगा। उत्तराखंड में आने वाले सभी यात्रियों का उत्तराखंड की सीमा पर कोरोना संक्रमण टेस्ट किया जाएगा और टेस्ट का शुल्क यात्री को ही देना होगा। यदि यात्री की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आई तो ही राज्य में प्रवेश की अनुमति मिलेगी अन्यथा सीमा से ही वापस जाना होगा। राज्य में रिकवरी रेट भी लगातार गिरता जा रहा है और मरने वालों की संख्या में धीमा उछाल देखने को मिल रहा है। अनलॉक-3 में राज्य में प्रतिदिन 3-4 मौतें देखने को मिल रही थी लेकिन अनलॉक-4 में यह आंकड़ा बढ़कर 10-12 प्रतिदिन हो गया है। ऐसे में शासन का यह लेटलतीफ निर्णय कारगर साबित हो सकता है।