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आखिरकार तीर्थ पुरोहित समाज ने शनिवार को 73वें दिन भी गंगोत्री धाम परिसर में अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन जारी रखा। इस दौरान उन्होंने गंगा भागीरथी नदी तट पर उत्तराखंड सरकार का पिंड दान कर मां गंगा से सरकार को सदगति देने की कामना की। देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड के खिलाफ लंबे समय से आंदोलन कर रहे गंगोत्री व केदारनाथ धाम के तीर्थपुरोहितों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है।


मांग पूरी नहीं होने से नाराज पुरोहितों ने अपना विरोध जताने के लिए शनिवार को उत्तराखंड सरकार का पिंड दान किया। विरोध जताने वालों में प्रेम बल्लभ सेमवाल, राकेश सेमवाल, संतोष सेमवाल, गोवर्द्धन सेमवाल, कामेश्वर सेमवाल, दिनेश सेमवाल, रवि सेमवाल, प्रवीण सेमवाल आदि पुरोहित शामिल रहे।


सरकार का पिंडदान केदारनाथ में भी किया गया। केदारनाथ में केदार सभा के अध्यक्ष विनोद शुक्ला के नेतृत्व में सभी तीर्थपुरोहित संगम तट पर पहुंचे और सरकार का पिंडदान किया। आचार्य संतोष त्रिवेदी ने कहा कि वे 12 जून से अर्धनग्न होकर देवस्थानम बोर्ड को भंग करने की मांग को लेकर धरना दे रहे हैं, लेकिन कोई सुध नहीं ले रहा है। इस मौके पर रमाकांत शर्मा, शशि अवस्थी, तेज प्रकाश पोस्ती, भगवती प्रसाद पोस्ती, अंकुर, प्रियांशु आदि मौजूद थे।

खैर, उत्तराखंड सरकार का पिंडदान होने से तत्कालीन सरकार के नेताओं को जीतेजी मोक्ष मिल जाएगा। क्योंकि मान्यता है कि चारों धामों के पुरोहितों के हाथों से अगर किसी का पिंडदान हो जाए तो वह पार लग जाता है। सरकार को जहां पैसा दिखता है वहां तो फट से हाथ डाल लेती है लेकिन पहाड़ी क्षेत्र में दीनहीन अवस्था में पड़े स्कूल नजर नही आते। ऐसी स्थिति में सरकार को निजीकरण याद आता है। ऐसे लोगों का तो जीतेजी श्राद्ध भी कर देना चाहिए क्योंकि जिन लाचार व्यवस्थाओं में आज राज्य का युवा भटक रहा है, शायद दुरात्माओं के मुक्त होने से संघर्षरत युवाओं को वर्षो की मेहनत का फल मिल जाए।