अगर आप किसी बीमारी की दवा खा रहे हैं तो जरूरी नहीं कि वह असली है या उसमें केमिकल का कोई मानक हो। ऐसी ही गड़बड़ी माधोपुर गांव में अगस्त में फूड लाइसेंस की आड़ में चल रही नकली दवा फैक्टरी से बरामद हुई दवाओं में मिली है। रुड़की के माधोपुर में पकड़ी गई नकली दवा फैक्टरी से बरामद हुई दवाओं की सैंपल रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। दरअसल, ड्रग विभाग ने जो नकली दवाएं जब्त की थीं, उन पर 500 एमजी मार्क था, लेकिन जांच में पता चला है कि उनमें किसी भी प्रकार का केमिकल नहीं मिला था।


ड्रग विभाग ने फैक्टरी से करीब डेढ़ करोड़ रुपये की नकली दवाएं पकड़ी थीं। इसके सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे। अब लैब से रिपोर्ट आई तो अधिकारी भी हैरान रह गए। दरअसल, ये दवाएं ब्रांडेड कंपनी के नाम से बिक रही थीं और उन पर क्षमता जैसे 250 और 500 एमजी मार्क था। जांच रिपोर्ट में पता चला है कि इन दवाओं में किसी भी प्रकार के एक्टिव ड्रग की मिलावट नहीं थी। सिर्फ ब्रांडेड कंपनी और एमजी के नाम पर ही बाजार में बेचा जा रहा था। ड्रग इंस्पेक्टर एमएस राणाओ ने बताया कि फैक्टरी से बरामद दवाओं के दस सैंपल लिए गए थे। बड़ी बात सामने आई है कि इनमें किसी भी प्रकार के एक्टिव ड्रग की मिलावट नहीं थी। आरोपी ब्रांडेड कंपनी के नाम से दवा बाजार में उतार लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर मोटा मुनाफा कमा रहे थे।