सरकार ने स्कूल खोलने से पहले एक बार अभिभावकों की प्रतिक्रिया लेनी चाहि तो कक्षा आठ तक स्कूलों को बन्द रखने पर अभिभावक और स्कूलों ने सहमति जताई है । यह सर्वे नौ जिलों में करवाया गया । नौ जिलों में अधिकारियों ने जब अभिभावकों का मन टटोला तो 50 से 60 फीसदी लोगों ने नौवीं से 12 वीं तक की कक्षाओं को 50 प्रतिशत क्षमता और सुरक्षा के साथ शुरू करने पर सहमति दी है। दून, टिहरी समेत बाकी पांच जिलों में अभी रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

सरकार ने सभी डीएम को एक अक्तूबर को स्कूल खोलने के संबंध में रिपोर्ट मांगी थी। अभिभावक, स्कूल प्रबंधकों से विचार विमर्श के लिए 7 दिन का वक्त दिया गया था, पर 10 अक्तूबर तक भी सभी जिलों की रिपोर्ट सरकार को नहीं मिली।

इससे पूर्व शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय खुद शिक्षकों से इस सन्दर्भ में सम्वाद कर चुके हैं। वर्चुवल माध्यम से हुए इस सम्वाद में सभी शिक्षकों ने कक्षा 10 व 12 वीं की कक्षाएं शुरू करने पर सहमति दी थी। अध्यापकों का कहना था कि पूर्व से बन्द पड़े स्कूलों की पहले अच्छे से सफाई करवाई जाए ताकि वहाँ किसी प्रकार का सांप या बिच्छु इत्यादि का भय न रहे। दूसरा कुछ शिक्षक जो शहर से पहाड़ी क्षेत्र में अप-डाउन करते हैं उनके कोरोना टेस्ट करवाये जाए और नियमित थर्मल स्कैनिंग की भी व्यवस्था हो ।  14 अक्टूबर को मुद्दा कैबिनेट में रखा जाएगा और उम्मीद की जा रही है 15 अक्टूबर से कक्षा 9 से 12 वीं तक स्कूल संचालन को हर झंडी मिल जाएगा ।