अब सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को मडुवा और झंगोरा का उचित मूल्य भी मिल सकेगा। जिसके लिए शीघ्र ही क्रय केंद्रों की स्थापना की जाएगी और सहकारी समितियां किसानों से दो हजार रुपये प्रति क्विटल की दर से मडुवा और दो हजार 5 सौ रुपये की दर से झंगोरा खरीद सकेंगे। सरकार की तरफ से जारी गाइडलाइन के बाद किसानों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। केंद्र सरकार की नीति किसानों की आय दोगुनी होने का लक्ष्य भी आसान होगा।


झंगोरा और मडुआ उत्पादक किसानों को अब अपनी फसल बेचने के लिए दर-दर भटकने की जरूरत नहीं है। सरकार ने न केवल दोनों फसलों की खरीद के लिए समर्थन मूल्य का एलान किया है। बल्कि जिले में सहकारी समितियां किसानों की उपज को एक अक्टूबर से खरीदना शुरू भी कर देंगी। जिले में किसानों ने गुणकारी मडुआ और झंगोरे की खेती पर फिर जोर देना शुरू कर दिया है। दरअसल सरकार ने भी सूबे में मडुवे और झंगोरे की फसल पर नजरें इनायत करनी शरू कर दी हैं। हालांकि किसान झंगोरा और मडुवे की फसल के तय समर्थन मूल्य को बढ़ाने की गुजारिश कर रहा है।


मडुवा और झंगोरा उत्पादक लेटी गांव निवासी किसान धन सिंह, मोहन सिंह, छनापानी निवासी विशन सिंह, गुसाईं सिंह कहते हैं कि समर्थन मूल्य में इजाफा होना चाहिए। ताकि किसान फसलों की खेती पर और जोर दे सके। ब्लाक प्रमुख गोविद दानू ने कहा कि किसान समितियां तय सरकारी समर्थन मूल्य पर झंगोरा और मडुवे को खरीदेंगी। हालांकि जरूरत है दोनों उपजों के बाजार को बढ़ाने की। ताकि मांग में तेजी आए और बिक्री बढ़ने से जहां किसान अपने उत्पादन में इजाफा कर सकें।