आमतौर पर मोनाल पक्षी 3000 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाले भूभाग पर रहना पसन्द करते हैं। लेकिन अब इस पक्षी को डेढ़ से दो हजार मीटर की ऊँचाई वाले स्थानों पर रहते देखा जा रहा है। यह इसलिए चिंताजनक है क्योंकि मोनाल के आशियाना बदलने की वजह जूनिपर झाडिय़ों का कम होना है। इन झाडिय़ों में वह घोसला बनाकर रहता है। हिमालयी पक्षी के जीवन में आए बदलाव को लेकर वन विभाग को शोध की जरूरत है। हल्द्वानी स्थित एमबीपीजी कॉलेज के जंतु विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सीएस नेगी कीड़ाजड़ी को लेकर विभाग द्वारा एक रिसर्च किया जा रहा है।


नेगी जी के मुताबिक दो साल पहले मुनस्यारी ब्लॉक के तहत आने वाले गौना गांव से ऊपर की तरफ व कीड़ाजड़ी रिसर्च मामले में जा रहे थे। जिस स्थान पर वह लोग थे। वो जगह करीब 2000 मीटर ऊंचाई पर थी। इस बीच झाडिय़ों से पक्षियों के उडऩे की आवाज आई। पहले छात्रों ने अनुमान लगाया कि यह राज्य पक्षी मोनाल है। मगर कुछ हैरानी हुई क्योंकि यह पक्षी आमतौर पर तीन हजार मीटर के क्षेत्र में अपना आशियाना बनाता है। और जूनिपर झाडिय़ों को घोंसला बनाने के लिए ज्यादा पंसद करता है।


विशेषज्ञों की माने तो इस बदलाव की वजह इंसानों का हिमालयी क्षेत्र में बढ़ता दखल और जूनिपर झाडिय़ों का दोहन भी है। प्रोफेसर डॉ. सीएस नेगी के मुताबिक मोनाल के साथ उसके बच्चों पर भी हमारी नजर पड़ी थी। जिस जूनिपर झाडिय़ों में मोनाल प्रजनन करती है। उसका बड़ी संख्या में दोहन होना इस बदलाव की वजह मानी जा सकती है। नेगी के मुताबिक खुद पर खतरा महसूस होने पर पक्षी और वन्यजीव अपना नया लाइफ-सर्किल बना लेते हैं।