उत्तराखंड रोडवेज कर्मचारी वर्ग हड़ताल



कोरोना काल में कंगाल हुए निगम को सरकार ने 15 करोड़ का आर्थिक सहयोग भी किया फिर भी रोडवेज कर्मचारियों को चार माह से वेतन नही दिया गया । इस पर कोर्ट ने भी सख्त लैजे में सरकार से पूछा कि आखिर कर्मचारियों को चार माह से वेतन क्यों नही दिया गया ? कर्मचारियों ने भी चार माह तक कुछ नही कहा जबकि कुछ बसें पूर्व से ही संचालित हो चुकी थी और थोड़ा बहुत पैसा निगम को आ ही रहा था । अब चार महीने से वेतन नहीं मिलने से खफा कर्मचारी आंदोलन की राह पर हैं। वेतन और देयकों के भुगतान को लेकर हाईकोर्ट के आदेशों ने भी प्रबंधन को चिंता में डाल दिया है। सरकार से अपेक्षित मदद नहीं मिल पा रही है। वेतन समेत अन्य मदों में देनदारी 250 करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच गई है।


वैसे तो रोडवेज कई सालों से घाटे में चल रहा था, लेकिन कोरोना काल ने रोडवेज को कंगाल कर दिया है। अब इस देनदारी को चुकाने के लिए प्रबंधन जमीन बेचने की तैयारी में है। निगम बोर्ड की बैठक में इसका प्रस्ताव आ सकता है। गांधी रोड पर रोडवेज के पास पुराना बस अड्डा, आरएम दफ्तर और हरिद्वार रोड पर कार्यशाला की जमीन है। सूत्रों के अनुसार रोडवेज इन जमीनों को एमडीडीए को बेचने की तैयारी कर रहा है। वहीं उत्तरांखण्ड रोडवेज कर्मचारी यूनियन के प्रदेश महामंत्री अशोक चौधरी का कहना है कि यूपी रोडवेज ने उत्तराखंड रोडवेज को परिसंपत्तियों का करीब 700 करोड़ रुपये देना है। यूपी हमें यह पैसा देता है तो जमीन बेचने की जरूरत नहीं है। अभी इस पर विचार चल रहा है। सभी संपत्तियों का बाजार मूल्य करीब 400 करोड़ है। अब देखना होगा कि उत्तराखंड रोडवेज के दिन लौटेंगे या लूटेंगे ।