20 वर्ष पूर्व तक यहां 25 परिवार स्थाई रूप से निवास करते थे, लेकिन अब पूरा गांव खंडहर हो गया है। यह तस्वीर चम्पावत में ग्राम पंचायत पऊ का घांघला गांव की है जो आज कुछ खण्डरहों के साथ अव्यवस्थाओं की यादें भर बनकर रह गया है । इसी गांव से लगे सिमल तोक में भी गिने चुने परिवार रह गए हैं। गांव खाली होने से खेत खलिहान भी बंजर हो गए हैं, जिससे लोगों के रोजगार के साधनों पर भी ताला लग गया है।


विकास खंड के गल्लागांव के लिए लोनिवि द्वारा सड़क स्वीकृत की गई थी। सड़क के एलाइमेंट से पूर्व ही कुछ ग्रामीणों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। उन्होंने भूमि कटने के एवज में मुआवजा देने की मांग रख दी। गलचौड़ा से भीडू तोक तक तीन किमी सड़क कटने के बाद लोनिवि ने सड़क काटने का काम रोक दिया। इधर सड़क न होने से घांघला गांव पूरी तरह खाली हो गया है तो सिमल गांव में रहने वाले 15 परिवारों में से 12 परिवारों ने पलायन कर लिया है, लेकिन इस गांव में अभी भी माल्टा, संतरा, बड़ी इलायची, आंवला की खेती बड़े पैमाने पर हो रही है। सड़क सुविधा के अभाव में काश्तकारों को अपनी मेहनत का उचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। बाजार न मिलने से लोगों ने गहत, मसूर, उड़द की खेती करना छोड़ दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि घांघला गांव की जमीन काफी उपजाऊ है। यहां सिंचाई के लिए पानी की भी कोई समस्या नहीं है। सड़क बनती है तो लोग एक बार फिर गांव में बसकर खेती करना शुरू कर देंगे। ग्रामीण फसल, फल और दालों का उत्पादन कर अपनी आजीविका का साधन मजबूत कर सकते हैं।


विभाग के जेई चंद्रशेखर मुरारी ने बताया कि ग्रामीणों के विरोध के बाद गलचौड़ा-गल्लागांव सड़क का काम रोकना पड़ा था। विभाग ने पंचायत प्रतिनिधियों से निरापत्ति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने को कहा है। निरापत्ति प्रमाण पत्र मिलने के बाद सड़क का काम शुरू किया जा सकता है। फिलहाल भूमि कटने पर मुआवजे का प्रावधान इस सड़क पर नहीं किया गया है। जबकि ग्रामीणों का कहना है कि विभाग से सड़क निर्माण में आ रही लोगों की जमीन का मुआवजा देने की मांग की गई है। विभाग मुआवजा देने को तैयार होता है तो ग्रामीण अपनी जमीन देने को तैयार हैं।