उत्तराखंड में में दो राष्ट्रीय दल भाजपा व कांग्रेस को छोड़ दें तो राज्य का अपना दल उत्तराखंड क्रांति दल ही एक मात्र सियासी विकल्प है। लेकिन उत्तराखंड क्रांति दल की स्थिति ऐसी नही है की अपने दम पर सरकार बना सके। यह अब महज चुनाव लड़ने भर का विकल्प बनकर रह गई है। चुनाव जितने के बाद नेता लोग राष्ट्रीय पार्टियों में शरण ले लेते हैं। यूकेडी का चुनावी क्षेत्र में भी कोई बहुत अच्छा प्रदर्शन देखने को नही मिलता है। इसके पास न तो किसी प्रकार का डिजिटल विज्ञापन प्लेट फॉर्म हैं और न ही इनके कार्यकर्ताओं की अपने क्षेत्रों पर अच्छी पकड़ है।

हाल ही में उत्तराखंड में चुनावी मैदान में उतरने वाली पार्टी, आम आदमी पार्टी की पकड़ भी उत्तराखंड क्रांति दल से अच्छी है। कारण ? कार्यकर्ताओ की क्षेत्र के प्रति ललक और डिजिटल विज्ञपन शैली । भाजपा सत्ता मे कैसे आई, केवल और केवल डिजिटल विज्ञपन और पार्टी सदस्यता बांटकर । इस बात को बहुत कम लोग ही पकड़ पाए और जो पकड़ पाया वो पार्टी निरन्तर प्रगति कर रही है। 

उत्तराखंड क्रांति दल की राज्य निर्माण में अहम भूमिका रही , लेकिन उस वक्त के बुद्धिजीवी लोग आज इस दुनियां में नही है और पार्टी से जुड़ने वाले लोग केवल और केवल निजी जीत का लक्ष्य लेकर चुनावी मैदान में उतर रहे हैं। डिजिटल विज्ञपन तो पार्टी का कहीं दिखता ही नही है। पार्टी अध्यक्ष की सहभागिता भी कहीं नजर नही आती और न ही पार्टी किसी प्रकार से खुद को चर्चा में बनाए रखने में कामयाबी हासिल कर पाई है। पार्टी का राज्य गठन में योगदान रहा है इसको नकारा नही जा सकता है लेकिन आज मुद्दे अधिक चुनौतीपूर्ण हैं। पार्टी के नेताओं की छवि दल बदलू नेताओं में है। दल बदलने के बाद भी क्षेत्र के लिए किसी प्रकार का विशेष योगदान पार्टी के नेताओ द्वारा किया गया हो, ऐसा भी नजर नही आता । तो उत्तराखंड क्रांति दल को मूल्यांकन करना चाहिए कि जनता आपको वोट किस आधार पर दे । 

बेरोजगारी, अपराध, निजीकरण और पहाड़ी क्षेत्र के विकास जैसे मुद्दों पर पार्टी के नेताओं का बयानबाजी न करना या बहुत कम करना, डिजिटल प्लेटफार्म पर पार्टी के विज्ञापनों का न होना, युवाओं के बीच तक पार्टी की विचारधारा का न पहुंचना इत्यादि ही पार्टी के पिछड़ने का कारण बना हुआ है। पार्टी को सशक्त नेतृत्व की जरूरत है। किसी भी राज्य के विकास में क्षेत्रीय दलों की अहम भूमिका होती है, इस बात को लोगों खासकर युवाओं को समझाने की आवश्यकता है। पार्टी में युवाओं को मौका मिले और पार्टी का अनुभवी नेता मार्गदर्शन का कार्य करता रहे । शिक्षा, स्वास्थ्य व रोजगार जैसी समस्याओं पर पार्टी को फ्रंट में होना चाहिए था, जो की नही है। ऐसे में पार्टी में संघर्षरत एक-दो नेताओं को भी हार का मुँह देखना पड़ सकता है।