पत्रकार से उलझना उत्तराखंड सरकार को महंगा पड़ता नजर आ रहा है । हाईकोर्ट ने मंगलवार को प्रदेश सरकार को तगड़ा झटका दिया। कोर्ट ने पत्रकार उमेश जे कुमार के खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमों को निरस्त करने का आदेश दिया। साथ ही उमेश की याचिका में लगाए आरोपों के आधार पर सीबीआई को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के खिलाफ लगे आरोपों को देखते हुए यह सही होगा कि सच सामने आए। यह राज्य हित में होगा कि संदेहों का निवारण हो। कोर्ट के फैसले के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत कहा कि हम कोर्ट का सम्मान करते हैं। माननीय कोर्ट किसी भी जांच एजंसी से जांच करवा ले, सरकार जांच में पूर्ण सहयोग करेगी ।

न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी की एकलपीठ ने मंगलवार को एक निजी समाचार चैनल के सीईओ उमेश की याचिका पर दिए फैसले में कहा कि याचिका (1187, उमेश जे कुमार बनाम उत्तराखंड राज्य, 2020) के पैरा आठ में लगाए आरोपों के आधार पर सीबीआई एफआईआर दर्ज करे। उमेश ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर अपने ऊपर देहरादून थाने में दर्ज मुकदमा निरस्त करने की मांग की थी। उनके खिलाफ सेवानिवृत्त प्रो. हरेंद्र सिंह रावत ने नेहरू कॉलोनी थाने में ब्लैकमेलिंग सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। याचिका के पैरा आठ की शिकायतों का निष्कर्ष में उल्लेख नहीं है। आदेश में कहा गया है कि उमेश की याचिका में लगाए आरोपों के आधार पर जांच का आदेश कोर्ट दे सकता है। सीएम रावत के खिलाफ लगे आरोपों की प्रकृति को देखते हुए यह जरूरी होगा कि सच सामने आए।