भारत दुनियां के बाकी देशों से खाद्य सुरक्षा को लेकर बेहद पिछड़ा हुआ है। यहाँ शुद्धता का कोई पैमाना लोगों के जीवन का हिस्सा नही है। देश की खाद्य सुरक्षा एजंसी भी सुस्त नजर आती है। जिस देश में कभी 75% लोग स्वयं कृषि उपज करते आज वही देश चीन से आये प्लास्टिक के चाँवल, अण्डे और शब्जियाँ और न जाने क्या खा रहा है। जब कभी खाद्य सुरक्षा एजंसियों को याद आती है तो कुछ सैंपल ले लेते हैं, नही तो वर्षों तक किसी को कोई मतलब नही है ।


बीते कुछ समय से भारतीय कारोबारी भी मुनाफे के चक्कर में खाद्य सामाग्री के मानकों से छेड़छाड़ करने लगे हैं। जिसका प्रभाव सीधा सीधा जनता पर देखने को मिल रहा है। नामीगिरामी कम्पनियां भी मुनाफाखोरी में लगी हुई हैं। उत्तराखंड स्थित पतंजलि पर समय समय पर आरोप लगते रहें हैं कि कम्पनी के उत्पाद मानकों पर खरे नही है। उसके बाद भी भारतीय बाजार में धड़ले से बिक रहें हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से मुनिकीरेती क्षेत्र से तेज ब्रांड सरसों के तेल और हल्दी सैंपल लिए थे। राजकीय प्रयोगशाला की जांच मं सैंपल फेल होने के बाद विभाग की ओर से तीन परचून दुकानदारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। कुछ समय पहले खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से मुनिकीरेती क्षेत्र से तेल और हल्दी का सैंपल भरा था। विभाग की ओर से उन्हें जांच के लिए राजकीय फूड लैबोरेट्री रुद्रपुर भेजा गया था। जांच में तेज ब्रांड सरसों तेल और श्रीराम ब्रांड हल्दी पाउडर का नमूना मानक के अनुरूप नहीं मिला था। सरसों तेल तेज ब्रांड व श्रीराम ब्रांड हल्दी पाउडर के नमूनों की जांच राज्य प्रयोगशाला में कराई गई थी, जो कि खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम के मानकों के अनुरूप नहीं पाए जाने पर विक्रेता निर्माता एवं डिस्ट्रीब्यूटर के विरुद्ध न्यायालय अपर जिला अधिकारी के कोर्ट में मुकदमा दर्ज कर दिया गया है। एक विक्रेता पर बिना लाइसेंस के कारोबार करने और खाद्य सुरक्षा संबंधी मानकों का अनुपालन नहीं करने पर नियमानुसार लिखित उत्तर नहीं देने पर खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम 2006 के तहत चालान कर मुकदमा पंजीकृत कर दिया गया है।


भगवान के नाम रखे ब्रांड नाम से भी लोगों के जीवन से खिलवाड़ हो रहा है। सरकार में बैठे लोग सिर्फ अपने तक सीमित रह गए हैं। उनको केवल बिल पास करने में मुनाफा दिखता है लेकिन ये नजर नही आता है कि देश में बिना इजाजत प्लास्ट का चाँवल आ कैसे रहा है। कम्पनी मालिक की राजनीति में पहुंच है तो वह बाजर में बिना मानक के उत्पाद बेच रहा है और सरकारें उसको अपराधी नही मानती तो ये जनता का दुर्भाग्य ही है। जिस देश का भोजन ही शुद्ध न रह जाए उसके विचार कैसे शुद्ध हों, उस देश का नागरिक कैसे स्वस्थ रहे, उस देश का युवा कैसे बौद्धिक कुशलता में आगे रहे।