उत्तराखंड के श्रम मंत्री व पूर्व अध्यक्ष हरक सिंह रावत और नए अध्यक्ष शमशेर सिंह सत्याल आमने-सामने आ गए हैं। तनातनी इस कदर बढ़ गई है कि हरक ने शुक्रवार को नए अध्यक्ष के ज्ञान पर ही सवाल उठा दिया। इस बीच बोर्ड के अध्यक्ष सत्याल ने करोड़ों रुपये की खरीददारी से संबंधित चेकों के भुगतान को रोकने के लिए बैंकों को पत्र लिख दिया है। लेकिन श्रमिकों से संबधित भुगतान को उन्होंने जारी रखने को कहा है। श्रम मंत्री बैंकों को पत्र लिखने पर अध्यक्ष के ज्ञान पर ही सवाल उठा दिया है। उनका कहना है कि सत्याल को बोर्ड के नियम-कायदों की जानकारी नहीं है।

कमान संभालने के बाद से ही शमशेर सिंह सत्याल बोर्ड की पत्रावलियों की तलाश में जुटे हैं, लेकिन उन्हें अभी तक कोई खास कामयाबी नहीं मिल पाई है। उधर, बोर्ड में उनकी एक-एक गतिविधि की सूचना श्रम मंत्री को मिल रही है। इसके संकेत हरक ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में भी दिए। बकौल हरक, उन्हें मालूम है कि दमयंती को कार्यमुक्त करने का पत्र कहां टाइप हुआ ।


हरक के तीखे बयान से घायल हुए सत्याल बोर्ड मे अपना शिकंजा कसने में लग गये हैं। पिछले दो दिनों से वह बोर्ड में पूर्व में हुई सामानों की खरीद की फाइलों को तलाश रहे हैं, लेकिन भरसक कोशिश के बाद भी कई फाइलों का पता नहीं चल रहा है। इससे अब दमयंती को हटाने के बाद फाइलों का एक और विवाद गहराने के आसार बन रहे हैं। सूत्र बता रहे हैं कि बोर्ड की अहम फाइलों के गायब होने की सूचना मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचा दी गई है। इस मामले में सोमवार तक शासन स्तर से कोई आदेश भी जारी हो सकता है। पूर्व अध्यक्ष श्रम मंत्री और नए अध्यक्ष के बीच संवादहीनता होने से फाइलों के विवाद के और ज्यादा गहराने के आसार हैं। माना जा रहा है कि बोर्ड की कई अहम फाइलें श्रम मंत्री के पास हो सकती हैं। सच्चाई जो भी हो, लेकिन प्रथम दृष्टया फाइलें न मिलने से बोर्ड की बेचैनी बढ़ी हुई हैं।