जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों से डिप्लोमा इन एलिमेंट्री एजुकेशन का दो साल का कोर्स पूरा करने के 10 महीने बाद भी प्रशिक्षित बेरोजगारों को सहायक अध्यापकों के रूप में नियुक्ति नहीं मिल पाई है। इससे नाराज शिक्षा निदेशालय में धरने पर बैठे बेरोजगार तेज ठंड के बावजूद खुले आसमान के नीचे रात बिताने को मजबूर हैं। स्कूलों में नियुक्ति की मांग को लेकर प्रदेशभर के डीएलएड प्रशिक्षित बेरोजगार आंदोलनरत हैं। जिनका शिक्षा निदेशालय में चल रहा धरना शुक्रवार को 33 वें दिन भी जारी रहा। धरने पर बैठे बेरोजगारों का कहना है कि दिसंबर 2019 में वह दो साल की ट्रेनिंग पूरी कर चुके हैं। प्रतियोगी परीक्षा में चयन के बाद इस ट्रेनिंग को शिक्षा विभाग की ओर से कराया गया था।

प्रदेश के प्रत्येक डायट में 100 छात्र-छात्राओं की डीएलएड की सीटें थीं, लेकिन विभाग की ओर से कहा गया कि प्रत्येक जिले से 50 छात्र-छात्राओं को ही शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक के रूप में नियुक्ति दी जा सकती है। जिसे देखते हुए 100 के स्थान पर प्रत्येक डायट से 50 छात्र-छात्राओं को डीएलएड कराया गया। लेकिन यह पहला मौका है जब डीएलएड करने के इतने लंबे समय बाद भी नियुक्ति नहीं हो पाई है। धरने में शामिल होने के लिए प्रदेशभर से डीएलएड प्रशिक्षित बेरोजगार देहरादून पहुंच रहे हैं। बागेश्वर से पहुंचे बेरोजगारों ने कहा कि यदि शीघ्र उनकी मांग पर अमल ना हुआ तो सचिवालय का घेराव किया जाएगा। वहीं उत्तराखंड क्रांति दल ने प्रशिक्षित बेरोजगारों के आंदोलन को समर्थन दिया है। दल के महानगर अध्यक्ष सुनील ध्यानी ने कहा कि दल के कार्यकर्ता भी बेरोजगारों के साथ शिक्षा निदेशालय में धरने पर बैठेंगे।