उत्तराखंड कर्मकार कल्याण बोर्ड से शनिवार को पूर्व अध्यक्ष डा. हरक सिंह रावत के कार्यकाल में नियुक्त 40 कर्मचारियों की सेवा खत्म कर दी गई है। कर्मकार बोर्ड में गत दो सालों में उपनल और पीआरडी के जरिए 40 से अधिक कर्मचारी नियुक्त किए गए थे।

सूत्रों के मुताबिक बोर्ड के ढांचे में उक्त पद शामिल तो है। लेकिन इन्हें भरने के लिए वित्त विभाग से सहमति नहीं ली गई। इसके बजाय उपनल, पीआरडी से नाम मंगवा लिए गए। इससे बोर्ड पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ रहा था। इन नियुक्तियों पर ऑडिट के दौरान सवाल उठने की आशंका को देखते हुए, नवनियुक्त बोर्ड ने इन सभी की नियुक्ति समाप्त करने का निर्णय लिया।

बोर्ड में समन्वयक के पद पर नियुक्त विजय सिंह चौहान को भी कार्यमुक्त कर दिया गया है। चौहान की तैनाती बतौर अध्यक्ष हरक सिंह रावत के रहने तक ही थी। हरक के हटने के बाद अब बोर्ड ने चौहान को भी कार्यमुक्त करने पर मुहर लगा दी है।


इसी के साथ अपर मुख्य कार्याधिकारी अशोक वाजपेई की सेवाएं भी समाप्त कर दी गई हैं। वाजपेई सेवानिवृत्त होने के बावजूद बोर्ड में जमे हुए थे। शनिवार को वाजपेई बोर्ड मुख्यालय में नजर तो आए लेकिन वो अपनी सीट पर नहीं बैठे। इससे पूर्व में बोर्ड सचिव दमयंती रावत को भी हटाया जा चुका है।