कोविड संक्रमण के चलते सभी स्कूल 13 मार्च से बंद चल रहे थे। शासन के आदेश पर एसओपी के आधार पर दो नवंबर से शिक्षा विभाग ने माध्यमिक स्कूल खोल दिए हैं। जिले में 189 माध्यमिक विद्यालय हैं जिनमें कक्षा दस और बारह की कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। इन दोनों कक्षाओं में करीब 15 हजार बच्चे पंजीकृत हैं लेकिन बच्चे 50 फीसदी भी नहीं आ रहे। लेकिन जो 50 फीसदी बच्चे अभी भी स्कूलों में नही आ रहे हैं शिक्षा उनका भी अधिकार है । इसलिए अपने घर,गली और गांव में लोगों को बताएं की बोर्ड परीक्षा का फॉर्म भरें ।


उत्तराखंड बोर्ड ने हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा के फार्म निकाल दिए हैं। बिना विलंब शुल्क के बोर्ड परीक्षा फार्म भरने की अंतिम 10 नवंबर निर्धारित है। मुख्य शिक्षा अधिकारी केके गुप्ता ने बताया कि सभी विद्यालयों को बोर्ड परीक्षा फार्म भेज दिए गए हैं तथा प्रधानाचार्यों को निर्देशित किया गया है कि निर्धारित समय अवधि में बोर्ड परीक्षा भरवाने की व्यवस्था की जाए। जो बच्चे स्कूल नहीं आ रहे, उनके अभिभावकों से फोन के माध्यम से संपर्क कर बोर्ड परीक्षा भरवाने को कहा गया है। कोरोना काल को देखते हुए बोर्ड परीक्षा फार्म भरने की तिथि बढ़ने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि जो बच्चे स्कूल नहीं आ रहे हैं उनकी ऑनलाइन पढ़ाई कराए जाने के भी निर्देश दिए गए हैं।


समस्या यह है कि पहाड़ी क्षेत्र में कहीं नेटवर्क की समस्या है तो कहीं लोगों के पास फोन ही नही है । ऐसे में जन संचार की अहम भूमिका रहती है कि वह अपने गाँव में देखे की उसके गांव का कोई बच्चा शिक्षा से वंचित न रह जाए । पहाड़ों पर स्कूलों की स्थिति भी इतनी सुदृढ नही है कि उनके पास अच्छे ऑनलाइन माध्यम की व्यवस्था हो । ऐसे में बच्चों के फॉर्म भरने से लेकर पढ़ाई तक की जिम्मेदारी में आम नागरिक की भूमिका का भी अहम योगदान हो सकता है। इसलिए अपने और निकटवर्ती गांवों में यह सूचना जरूर दें ।