यूँ तो मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को एक विधवा महिला शिक्षिका का दर्द नजर नही आया । जो दुर्गम क्षेत्र से सुगम में आने के लिए उनके आगे गिड़गिड़ाती रही, लेकिन अब 2022 नजदीक है इसलिए दुर्गम क्षेत्र व विपरीत परिस्थितियों में कार्यरत भारतीय सेना के जवानों की याद आ गई। याद आती तो भी इसको राजनीतिक चश्मे से नही देखा जाता लेकिन सीएम साहब तो सीधा बॉर्डर क्षेत्र में ही कूच कर गए ।


दीपावली मनाने के लिए मुख्यमंत्री सुबह 9.15 बजे हर्षिल के हैलीपैड पर पहुंचे। जहां से सात किलोमीटर बॉर्डर की ओर कोपांग अग्रिम चौकी पर पहुंचे। जहां 35वीं वाहिनी भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी) के हिमवीरों ने गर्मजोशी से उनका स्वागत किया। करीब सौ हिमवीरों को मुख्यमंत्री ने अपने हाथों से मिठाई खिलाई तथा दीपावली की बधाई दी।


अग्रिम चौकी के परिसर में हिमवीरों को संबोधित किया तथा उन साथ फोटो खिंचवाई। साथ ही चीन सीमा से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर आइटीबीपी के अधिकारियों से जानकारी। कोपांग के बाद मुख्यमंत्री हर्षिल में सेना की बिहार रेजीमेंट के जवानों के बीच पहुंचेंगे।


कोपांग और हर्षिल में आइटीबीपी व सेना के जवानों के बीच पहुंचकर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने अपने हाथों से जवानों को मिठाई खिलाई और दीपावली की शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री ने पहले कोपांग में 35वीं वाहिनी आइटीबीपी जवानों के साथ दीपावली मनाई। उन्होंने जवानों का हौसला अफजाई किया तथा अपने दीपावली के अनुभवों को भी साझा किया।