ठंड में कोरोना संक्रमण के फैलने के खतरा चार गुना, संक्रमितों को ए.सी. में रहने से क्यों किय जाता है मना ।


 

कोरोना भारत में मार्च माह में आया था और मार्च में भारत में गर्मी शुरू होने लगती है। अब कोरोना के बारे में जुटाए गये आंकड़ों से जो आंकलन लगया गया वह यह है कि कोरोना वायरस गर्म जलवायु में अपनी सक्रियता ज्यादा देर नही बनाए रह सकता है।


यही मुख्य वजह थी कि भारत में कोरोना का प्रकोप अन्य देशों की अपेक्षा में कम देखा गया । दरअसल कोरोना वायरस ठंडी हवाओं में अधिक देर तक संचरण कर सकता है बजाय गर्म हवाओं के । मार्च से लेकर अक्टूबर तक भारत में तापमान उच्च रहने के वजह से कोरोना अपनी सक्रियता को उस गति से नही बढ़ा सका जैसे की अन्य देशों में देखने को मिला ।

भारत में नवम्बर ,दिसंबर, जनवरी और फरवरी इन चार माहों में कोरोना के पुनः सक्रिय होने के पूरी आशंका है। ऐसा नही है कोरोना अभी सक्रिय नही है, लेकिन अब सरकारें आंकड़ें छिपाने लगी है फिर भी अगर उत्तराखंड राज्य की बात करें तो हर दिन किसी न किसी की मौत कोरोना संक्रमण के चलते हो रही है ।

कोरोना वायरस सिर्फ एक ही स्थिति में घतक है और वह स्थिति है जब वायरस किसी के फेफड़ों में प्रवेश कर जाए। अब तक के शोधों से पता चला है कि कोरोना वायरस कुछ समय के लिए गले में फंसा रहता है और यदि उस समय ही व्यक्ति गर्म पानी का सेवन कर ले तो वायरस पानी के साथ लिवर में चला जाता है। मानव शरीर में लिवर को दूसरा दिमाग कहा जाता है। लिवर को जो चीज शरीर ले हित में नही लगती उसको सीधे मल नली में भेज देता है । इस प्रकार से व्यक्ति कोरोना वायरस के दुष्प्रभाव से बच जाता है।

ए.सी. (AC) को कोरोना वायरस की स्थिति में घातक क्यों माना जाता है ? दरअसल ए.सी. मानव शरीर के लिए हर प्रकार से घतक ही है । और इसके घतक होने का जो कारण है वह कोरोना संक्रमण की स्थिति में प्रथम कारक है, इसलिए ए.सी. को मना किया जाता है। कुछ लोग सोचते हैं कि ए.सी. को कोरोना में ठंड की वजह से माना किया जाता है लेकिन ऐसा नही है। हाँ, अगर जुखाम और गले में दर्द जैसी स्थिति हो तो ए.सी. के लिए मना किया जा सकता है लेकिन यह जरूरी नही है कि कोरोना होने की स्थिति में आपको जुखाम या गले में दर्द अधिक दिन तक महसूस हो ।


ए.सी. के बारे में अब तक के शोधों में पाया गया है कि ए.सी. शरीर में ऑक्सिजन की मांग को पूरा करने वाले ऊतकों को प्रभावित करता है। मतलब की शरीर में ऑक्सिजन लेवल को प्रभावित करता है। कुछ शोधों में ए.सी. को कैंसर के लिए भी कारक माना गया है। अब क्योंकि कोरोना वायरस भी फेफड़ों को प्रभावित करता है इसलिए अगर ऐसा व्यक्ति ए.सी. का उपयोग करता है तो उसमें ऑक्सिजन की सप्लाई प्रभावित होने का खतरा और भी बढ़ जाता है।

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