उत्तराखंड पलायन आयोग की ओर से उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान राज्य में आए प्रवासी राज्य वासियों के बारे में एक पुस्तक के रूप में कुछ महत्वपूर्ण सूचनाएं उपलब्ध कराई गई। सोमवार को मुख्यमंत्री ने इस पुस्तक का विमोचन किया, इस पुस्तक में पलायन आयोग की ओर से जो आंकड़े दिए गए हैं वो राज्य में कोरोनावायरस काल के दौरान आए करीब 3,60,000 प्रवासियों को लेकर काफी महत्वपूर्ण जानकारियां दे रहे हैं।


पलायन आयोग द्वारा साँझा की गई जानकारी के अनुसार कोरोना काल के दौरान राज्य में लौटे 3.60 लाख प्रवासियों में से 01 लाख प्रवासी वापस लौटे हैं। सितम्बर, 2020 के अंत तक कोविड-19 महामारी के कारण राज्य में लौटे प्रवासियों में से लगभग 29 प्रतिशत पुनः पलायन कर गए हैं। राज्य में लौटे प्रवासियों में से लगभग 71 प्रतिशत अपने मूल निवास या उसके पास के क्षेत्रों में चले गए हैं। इनमें से लगभग 33 प्रतिशत कृषि, पशुपालन आदि, 38 प्रतिशत मनरेगा, 12 प्रतिशत स्वरोजगार तथा 17 प्रतिशत अन्य पर आजीविका पर निर्भर हैं।


पलायन आयोग के उपाध्यक्ष एस.एस. नेगी ने बताया कि जनपद अल्मोड़ा में लगभग 39 प्रतिशत लौटे प्रवासी स्वरोजगार पर निर्भर हैं जो कि अन्य जनपदों से काफी अधिक है। जनपद नैनीताल, ऊधमसिंह नगर तथा टिहरी में भी अधिक संख्या में लौटे प्रवासी स्वरोजगार पर अपनी निर्भरता दिखा रहे हैं। काफी संख्या में लौटे प्रवासी कृषि, बागवानी, पशुपालन आदि, पर आजीविका के लिए निर्भर हैं। इनमें से सबसे अधिक जनपद नैनीताल 59 प्रतिशत, पिथौरागढ़ 57 प्रतिशत, बागेश्वर 53 प्रतिशत चम्पावत 40 प्रतिशत तथा उत्तरकाशी 45 प्रतिशत में है जबकि मनरेगा पर सबसे अधिक जनपद हरिद्वार 75 प्रतिशत, पौड़ी 53 प्रतिशत, टिहरी 51 प्रतिशत तथा चमोली 43 प्रतिशत में लौटे प्रवासी उक्त क्षेत्रों में आजीविका के लिए निर्भर हैं।