टिहरी जिले में प्रभारी समाज कल्याण अधिकारी ने शुक्रवार को अंतरधार्मिक विवाह योजना के बारे में सार्वजनिक सूचना जारी की थी। समाज कल्याण विभाग की इस योजना में अंतरजातीय व अंतरधार्मिक विवाह के लिए बतौर प्रोत्साहन राशि 50 हजार रुपये देने का प्रविधान है। यह कानून अविभाजित उत्तर प्रदेश के दौर से अस्तित्व में है। प्रदेश की पिछली कांग्रेस सरकार ने इस योजना में प्रोत्साहन राशि 10 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दी थी। इस योजना के संबंध में प्रभारी समाज कल्याण अधिकारी की ओर से जारी सूचना से बवाल मच गया था।


जबकि मौजूदा प्रदेश सरकार ने वर्ष 2018 में उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता कानून लागू किया था। इसमें जबरन, प्रलोभन, जानबूझकर विवाह या गुप्त एजेंडे के जरिये धर्म परिवर्तन को गैर जमानती अपराध घोषित किया गया है। ऐसे में अंतरधार्मिक विवाह के लिए प्रोत्साहन राशि को लेकर सरकार को असहज होना पड़ा है। मुख्यमंत्री ने प्रकरण की मुख्य सचिव को जांच के आदेश दिए थे।


अंतरधार्मिक विवाह प्रोत्साहन योजना की सूचना सार्वजनिक किए जाने के प्रकरण की जांच शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में मुख्य सचिव ने बीते रोज ही सचिव समाज कल्याण को जांच के आदेश दिए थे। मंगलवार को प्रभारी समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल ने सचिवालय में सचिव समाज कल्याण के समक्ष अपना पक्ष रखा। उनका कहना था कि यह योजना पहले से चली आ रहा है और रूटीन प्रक्रिया के तहत इसकी सूचना सार्वजनिक की गई थी।