ऋषिकेश में गंगा को मैला करने का काम कर रहें हैं पर्यटक, पहले भी हो चुके इसी प्रकार के कृत्य ।

 



कोरोना काल में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने गाइड लाइन में राहत देने के साथ पर्यटकों को यहां आने की छूट प्रदान की है। जिम्मेदार जिला पर्यटन विभाग गंगा तट पर सात्विकता के साथ हो रहे खिलवाड़ को लेकर आंखें मूंदे बैठा है। साहसिक पर्यटन की आड़ में कुछ अनैतिक कार्य हो रहे हैं। वर्तमान में जनपद टिहरी के शिवपुरी क्षेत्र में गंगा तट पर बैठकर कुछ पर्यटकों की हुक्का पीते हुए फोटो इंटरनेट पर काफी वायरल हो रही है। सोबत सिंह राणा (जिला पर्यटन विकास अधिकारी, टिहरी गढ़वाल) का कहना है कि टूरिज्म ऐसा सेक्टर है, जहां पैसा कमाने की होड़ में लोग गलत काम कर बैठते हैं। वर्तमान में यहां हजारों पर्यटक आ रहे हैं। इस बात की गारंटी नहीं है कि यह कौन लोग हैं। फिर भी विभाग मामले की जांच कर रहा है। लॉकडाउन के दौर में तमाम पर्यटन गतिविधियां बंद रही। जिसका सबसे बड़ा परिवर्तन पर्यावरण में देखने को मिला। करीब दो माह में ही पर्यावरण पूरी तरह से प्रदूषण रहित हो गया था। गंगा का जल भी साफ हो गया था ।


अनलॉक के बाद पर्यटकों के लिए जैसे ही पर्यटन गतिविधियां खुली हैं। गंगा और सहायक नदियों को पर्यटक दूषित ही नहीं कर रहे बल्कि इनकी सात्विकता से भी खिलवाड़ कर रहे हैं। मुनिकीरेती से मात्र 90 किलोमीटर की दूरी पर टिहरी जिला मुख्यालय है। वहीं से बैठकर पर्यटन विभाग यहां संचालित होने वाली साहसिक गतिविधियों की निगरानी कर रहा है। जिसका परिणाम कुछ पर्यटकों की मनमानी के रूप में सामने नजर आ रहा है। पिछले कुछ दिनों से शिवपुरी उत्तराखंड के नाम पर इंस्टाग्राम व इंटरनेट पर कुछ पर्यटकों की गंगा के किनारे बैठ कर हुक्का पीते हुए फोटो वायरल हो रही है। गंगा के प्रति संवेदनशील व्यक्ति इस तरह की फोटो पर टिप्पणी भी कर रहे हैं। यहां राफ्टिंग कैंप सहित तमाम ऐसी गतिविधियों पर नजर रखने की जिम्मेदारी जनपद टिहरी जिला पर्यटन विभाग के ऊपर है। यदि विभाग इस मुद्दे पर संवेदनशील होता तो इस तरह की गतिविधियों को रोका जा सकता था। मगर, ऐसा नहीं हो रहा है।

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