पहाड़ी नागरिकों को पलायन रोको की शिक्षा देने वाले नेता पहले अपने गाँव पर नजर डालें ।


उत्तराखंड के विकास का दावा करने वाले जनप्रतिनिधि अपने गांव की ही कसौटी पर खरे नहीं उतर पा रहे हैं। यहां मौजूदा सरकार के मंत्रियों के गांवों के हाल तो यही साबित कर रहे हैं। मंत्रियों के अपने खुद के गांवों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। बिजली-पानी, सड़क, स्कूल और अस्पताल की सुविधाएं लोगों को मयस्सर नहीं हैं।


पहाड़ समीक्षा इस विषय पर बहुत सारे लेख पहले भी प्रकाशित कर चुका है। ऐसे में सवाल उठता है कि जो अपने गांवों की छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं, उनसे राज्य के समग्र विकास की उम्मीद कैसे की जाए?


मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के पैतृक गांव खैरासैंण में राजकीय ऐलोपैथिक चिकित्सालय फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहा है। कुछ महीने पहले ही यहां के डॉक्टर को सतपुली अटैच कर दिया गया था। नतीजा यह है गांव के लोगों को उपचार कराने के लिए मीलों दूर सतपुली की दौड़ लगानी पड़ती है। ग्राम प्रधान सुनीता जुयाल ने बताया कि राजकीय ऐलोपैथिक चिकित्सालय एक फार्मासिस्ट के भरोसे ही चल रहा है। कृषि और बागवानी सीएम के प्राथमिकता वाले क्षेत्र में शामिल हैं। लेकिन, उनके अपने ही गांव में बंदर और सूअर फसल को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। अब तक इसके लिए भी कोई ठोस योजना नहीं बन पाई है।


पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज का पैतृक गांव धड़गांव ग्राम सभा सेडियाधार है। वर्ष 2014 में सेडियाधार सहित दर्जनों गांव को पानी पहुंचाने के लिए चौबट्टाखाल पम्पिंग योजना शुरू की गई, लेकिन इस योजना से नलों में पानी तक नहीं पहुंचा। यही नहीं, मोबाइल नेटवर्क भी पटरी से उतरा हुआ है। सेडियाधार प्रधान सुनीता देवी का कहना है कि हमारे गांव में पानी की समस्या हमेशा बनी रहती है।


कैबिनेट मदन कौशिक का गांव इमलीखेड़ा में पेयजल समस्या का हल नहीं हो पा रहा है। 12 हजार की आबादी वाले इमलीखेड़ा में स्वजल प्रोजेक्ट से 2005 में एक ओवर हेड टैंक का निर्माण कराया गया था। बीते 13 साल से यह टैंक शोपीस बना हुआ है। ट्यूबवेल खराब होने के कारण इसका उपयोग नहीं हो पाया है। इसकी मोटर भी अब गायब हो चुकी है। गांव को नगर पंचायत बनाने का वादा भी लंबे समय से अटका है।


सरकार में कद्दावर मंत्रियों में शुमार डॉ. धन सिंह रावत के गांव नौगांव में बिजली, पानी और सड़क तो है, लेकिन खेती-बाड़ी बर्बाद हो रही है। बंदर और सुअरों के आंतक से वहां के लोग परेशान हैं। ये जानवर लोगों की खून-पसीने की मेहनत पर पानी फिरा रहे हैं। ठोस योजना न होने के कारण लोगों ने खेती-बाड़ी छोड़नी शुरू कर दी है। इस गांव में करीब 100 परिवार रहते हैं।


शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे के गृहनगर गूलरभोज में उनके घर से मात्र 200 मीटर की दूरी पर स्थित एएनके इंटर कॉलेज की हालत खस्ता है। 23 कमरों वाले इस स्कूल में करीब एक हजार छात्र पढ़ते हैं। यहां लंबे समय से शिक्षकों के चार पद खाली हैं, जबकि, 13 कमरे जर्जर हालत में हैं। इस क्षेत्र में कोई भी डिग्री कॉलेज नहीं है। पीएचसी गूलरभोज में वर्ष 2006 से यहां प्रभारी डॉक्टर का पद भी खाली है।



परिवहन मंत्री यशपाल आर्य का पैतृक गांव नैनीताल के अंतर्गत बोराकोट तोक त्यूरा ब्लॉक रामगढ़ में है। त्रिवेंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री बनने के बाद से उनके पैतृक गांव में कोई काम नहीं हुआ। मंत्री की घोषणा के बावजूद यहां बस स्टैंड और यात्री शेड तक नहीं बन सका। यहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है, लेकिन न तो एक्सरे मशीन है और न ही पैथोलॉजी की सुविधा। यहां तैनात तीन डॉक्टरों में से दो हल्द्वानी से अटैच हैं।


वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत के गांव गहड़ के लोग खस्ताहाल सड़क और पेयजल आपूर्ति सुचारू न होने से परेशान हैं। स्वीत से गहड़ तक पांच किलोमीटर के दायरे में लोग दुखी हैं। इस मार्ग पर एक किमी तो पिछले काफी समय से कच्ची छूटी हुई है। पंपिंग योजना से गांव तक पानी की सप्लाई बहुत खराब है।


टिहरी की नरेंद्रनगर सीट से विधायक सुबोध उनियाल मूल रूप से पौड़ी के औणी गांव के हैं। सुबोध के पैतृक गांव के लोगों को उनसे काफी उम्मीद रहती है, लेकिन उनकी उम्मीदें पूरी नहीं हो पा रही हैं। खंडाह-गिरगांव-पीपलकोटी-बमठि मोटर मार्ग कई वर्षों से बदहाल है। औणी से सत्याखाल लिंक रोड भी सपना बनी हुई है। इस गांव में पानी की आपूर्ति भी नियमित नहीं है।


विधायक और राज्य मंत्री रेखा आर्य का गांव सुनाड़ी अल्मोड़ा-सोमेश्वर हाईवे से जुड़ा है। सुनाड़ी गांव में मूलभूत परेशानी नहीं है। पांच तक स्कूल में मानक के अनुसार शिक्षक हैं। गांव से 300 मीटर की दूरी में इंटर कॉलेज है। बिजली-पानी की भी परेशानी नहीं है। सिंचाईं के लिए लिफ्टिंग योजना है।


पूर्व सीएम हरीश रावत का मोहनरी पंतगांव भिकियासैंण ब्लॉक के अंतर्गत सड़क किनारे है। गांव से चार किमी दूरी पर जीआईसी चौनलिया में अर्थशास्त्र-अंग्रेजी प्रवक्ता के पद एक साल से रिक्त हैं। राजकीय पॉलीटेक्निक में सिर्फ एक ट्रेड की वजह छात्र संख्या काफी कम है। मोहनरी में प्राथमिक स्कूल, जूनियर हाईस्कूल गुरड़खेत में छात्र संख्या चार और 11 है। भतरोजखान सीएचसी में सुविधाएं अब तक मुहैया नहीं कराई गई हैं।


कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के गांव बिरनाड बास्तिल को पानी के संकट से जूझना पड़ता है। करीब पैंतालीस वर्ष पहले तीन किमी पेयजल की योजना बस्तार खड्ढ से बिरनाड गांव तक बनी थी। यह योजना अब जर्जर हाल हो चुकी है। पेयजल योजना के पाइप जगह-जगह टूट चुके हैं। यही नहीं, कई स्थानों पर पाइप लाइन में लीकेज है। कई स्थानों पर प्लास्टिक की पाइप लाइन बिछाकर जलापूर्ति की जा रही है।


ऐसे ही कई अन्य छोटे बड़े मंत्रियों के गाँव बीरान भी हो चुके हैं। 2018 में आई रिपोर्ट के आंकड़े जो स्थिति बताते हैं उससे पता चलता है कि पहाड़ों पर लोग किस प्रकार से जीवन काट रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार 400 से अधिक गांव ऐसे पाए गये जहाँ प्रति गाँव 10 व्यक्ति से भी कम जनसंख्या में लोग रह रहे हैं। आज दो साल बाद ये लोग भी वहां पर रह रहे हैं या नही इसका कोई आंकलन सरकार के पास नही है।


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