पांच दशक पूर्व विकासखंड बेरीनाग व कनालीछीना के अगड़ियागाड़ा, जालड़ी, मुसगांव, रोटन, पिलखी, मायल, रीठा रौतेली, अनोली, पनोली, बगनियागाड़ा समेत एक दर्जन गांवों के ग्रामीणों के आवागमन के लिए नैनी केदारेश्वर में रामगंगा नदी पर झूलापुल बनाया गया था । झूलापुल विगत दो वर्ष से खस्ताहाल बना हुआ है। झुला पुल में दो वर्ष पूर्व किया गया डामर उखड़ चुका है। जिस कारण पुल में जगह-जगह गड्ढे़ बने हुए हैं। इस पुल से एक दर्जन गांवों के ग्रामीण आवागमन करते हैं।



देखरेख के अभाव में यह पुल जर्जर हो चुका है। इस पुल की देखरेख का जिम्मा लोनिवि पिथौरागढ़ के पास है। दो वर्ष पूर्व लोनिवि पिथौरागढ़ द्वारा इस झूलापुल का मरम्मत कार्य किया गया था और पुल में बने गड्ढों पर नई टिन की चादर डालकर डामरीकरण किया गया था, मगर दो वर्ष में ही पुल से डामर उखड़ने लगा है। झूलापुल के बीच में डामर उखड़ने से पुल में डाले गए लोहे के टिन टूट गए हैं और पुल में गड्ढे बन चुके हैं। जिस कारण पुल में कभी बड़ा हादसा होने की संभावना है।



स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत के बाद भी विभाग इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। यदि अविलंब पुल को दुरु स्त नहीं किया गया तो क्षेत्र की जनता उग्र आंदोलन करने को बाध्य होगी। इस पर सुनील कुमार, सहायक अभियंता, लोनिवि, पिथौरागढ़ का कहना है कि नैनी केदारेश्वर झूलापुल में लोहे के चादर बिछाने का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है। बजट स्वीकृत होते हुए पुल में लोहे के चादर लगाकर आवागमन सुगम बनाया जाएगा।