उत्तराखंड अपराध व अपराधियों के लिहाज से शांतिपूर्ण राज्य माना जाता रहा है। राज्य के मूल नागरिक अपनी संस्कृति और अच्छे विचारों के लिए पूरे भारत में एक अलग ही पहचान रखते हैं । लेकिन विगत कुछ समय से पहाड़ो पर बाहरी लोगों के पहुंचने से अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा । यौन, लूट और हत्या जैसे अपराध पहाड़ी क्षेत्रों में भी मैदानी इलाकों की तरह व्याप्त होते जा रहे हैं । हालांकि 99% मामलों में अपराधी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर व अन्य राज्यों से आये लोग हैं । लेकिन चिंता का विषय यह है कि सरकार ऐसे लोगों को पनाह क्यों दे रही है ।



उत्तरकाशी जिले की अपराध रिपोर्ट

बीते पांच सालों में जिले उत्तरकाशी में दुष्कर्म के 58 मामले सामने आ चुके हैं। पुलिस रिकार्ड के अनुसार वर्ष 2016 एवं 2018 में दुष्कर्म के 06-06 मामले, जबकि वर्ष 2017 में 13, वर्ष 2019 में 18 और वर्ष 2020 में 15 मामले सामने आ चुके हैं। महिला उत्पीड़न को रोकने के लिए बने कड़े कानून और जागरूकता संबंधी प्रयासों के बावजूद यह आंकड़े चिंताजनक हैं।



टिहरी जिले की अपराध रिपोर्ट

नई टिहरी में तीन सालों में 37 मामले दुष्कर्म के आए। वर्ष 2018 में दुष्कर्म के सात, वर्ष 2019 में 15, वर्ष 2020 में 15 दुष्कर्म के केस आए। हालांकि वर्ष 2020 में महिला हिंसा में कमी आई है। छेड़छाड़ और मानसिक उत्पीड़न जैसे कई मामले तो पुलिस तक पहुंचते ही नहीं हैं। एसएसपी तृप्ति भट्ट ने कहा कि पिछले सालों की अपेक्षा 2020 में महिला अपराध के कम मामले सामने आए हैं। महिलाओं की सुरक्षा के लिए पुलिस को सख्त निर्देश दिए हैं कि पोक्सो जैसे मामले सामने आने पर मुकदमा दर्ज कर आरोपी को तत्काल गिरफ्तार करें।


चमोली जिले की अपराध रिपोर्ट

चमोली जिले में दो साल में दुष्कर्म के आठ मामले दर्ज हुए हैं, जबकि छेड़छाड के 12 मामले दर्ज हुए। वर्ष 2019 में दुष्कर्म के तीन और छेड़छाड़ के छह, वर्ष 2020 में दुष्कर्म के पांच और छेड़छाड़ के छह मामले दर्ज हुए। दोनों सालों में महिला अपराध के कुल 40 मामले दर्ज हुए हैं, जिसमें दहेज उत्पीड़न, बहला फुसलाकर भगाने के मामले भी शामिल हैं।



रुद्रप्रयाग जिले की अपराध रिपोर्ट

जिले में तीन वर्षों में रेगुलर पुलिस क्षेत्र में दुष्कर्म के 11 मामले सामने आए हैं, जिसमें आरोपियों को सजा हो चुकी है। पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि इस वर्ष अभी तक दुष्कर्म की चार घटनाएं हो चुकी हैं, जबकि वर्ष 2019 में 5 व 2018 में 3 घटनाएं हुईं।



पौड़ी जिले की अपराध रिपोर्ट 

उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में सर्वाधिक अपराध पौड़ी जिले में देखे जा रहे हैं । चाहे यौन उत्पीड़न हो, डकैती हो, हत्या हो या फिर लड़कियों को अगवा करने की खबर हो । इसका सबसे बड़ा कारण भी इसकी सीमाओं का उत्तर प्रदेश से लगना माना जा रहा । अपराध के बाद अपराधी आसानी से उत्तर प्रदेश में शरण ले लेता है । अकेले वर्ष 2020 में यौन उत्पीड़न के आठ से अधिक मामले उजागर हो चुके हैं । इसके अलावा डकैती और अपहरण के दर्जनभर मामले भी दर्ज हुए हैं ।


पहाड़ी क्षेत्र को सरकार विकास के नाम पर विनाश की तरफ धकेल रही है । आने वाले वक्त में जब पहाड़ो पर रेल से यात्रा सुगम होगी तो मैदानों से दबे कुचले लोग पहाड़ी क्षेत्रों में शरण लेंगे और इस प्रकार के अपराधों  में तेजी देखने को मिल सकती है । पहाड़ी क्षेत्र में आज अधिकांश घरों में बुजुर्ग लोग ही रहते हैं, क्योंकि नई पीढ़ी को रोजगार के लिए मैदानी राज्यों में शरण लेनी पड़ती है । इसलिए सरकार को चाहिए की पहाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा को देखते हुए बाहरी लोगों को बिना पंजीकरण के पहाड़ी क्षेत्रों में प्रवेश न दे । कार्य हेतु बाहर से आई लेबर और ठेकेदार को क्षेत्रीय पुलिस और पटवारी द्वारा जाँच के बाद ही कार्य की अनुमति दी जाय और यदि ठेकेदार या उसकी लेबर का कोई व्यक्ति आपराधिक श्रेणी में आता है या आगे कोई ऐसा कार्य करता है तो उसका ठेका निरस्त किया जाय साथ ही कुछ माह की जेल और राज्य में कार्य पर प्रतिबंध हो ।