उत्तराखंड में आये दिन पुलिस नशे के सौदागरों को गिरफ्तार कर रही है । प्राप्त जानकारी के अनुसार उत्तराखंड के गढ़वाल मण्डल के टिहरी, उत्तरकाशी, पौड़ी, चमोली और देहरादून जिलों में नशे का कारोबार तेजी से पैर पसार रहा है । कल ऋषिकेश में 7.05 ग्राम स्मैक के साथ एक व्यक्ति को पकड़ा गया है । इससे पहले उत्तरकाशी में भी कुछ लोग पकड़े गये थे । इस करोबार में दूसरे राज्यों से आये लोग ही ज्यादातर लिप्त हैं लेकिन नशे के स्तेमाल से उत्तराखंड की नई पीढ़ी बर्बादी की कगार पर खड़ी है ।


एक शिक्षक से प्राप्त जानकारी के आधार पर पता चला है कि श्रीनगर गढ़वाल के एक निजी स्कूल के बच्चे भी इस प्रकार के नशे मेंं संलिप्त हैं । यह तो वह जानकारी है जो सूत्रों के हवाले से मिली है । इसके अलावा भी अन्य जिलों में कई ऐसे स्कूल होंगे जहाँ बच्चों में इस प्रकार के शौक पनप रहे होंगे ।


आज के दौर में बच्चे को नामी स्कूल में भेजने भर से अभिभावक सोचते हैं कि उनकी जिम्मेदारी पूरी हो गई है। क्योंकि बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाना हर अभिभावक का सपना होता है । लेकिन कई बार इन्हीं बड़े स्कूलों से पढ़ने वाले बच्चों के शौक भी ऐसे हो जाते हैं कि अभिभावक अंत में लाचार और विवश नजर आते हैं ।


इसलिए अभिभवकों को चाहिए कि वह अपने बच्चों की हर एक्टिविटी पर नजर रखें । अपने बच्चों को गलत संगति से दूर रखें, उसके साथ समय व्यतीत करें । नियमित बच्चों को नशे से दूरी बनाये रखने की प्रेरणा दें और बच्चों का स्कूली बैग भी चैक करें । अमूमन पहाड़ी क्षेत्र में देखा गया है कि सरकारी स्कूलों के बच्चे भी गुटखा,चैनी-खैनी, दिलबाग और गोल्डन जैसे कैंसर कारक उत्पादों का प्रयोग करते हैं।


धीरे-धीरे वह इन सब के आदी भी हो जाते हैं । बढ़ती उम्र के साथ जब वह इन सब चीजों से दूर होना चाहते हैं, तो चाह कर भी नही हो पाते । लेकिन यही बच्चे स्कूली दिनों में इन चीजों को या तो स्कूली बैग में छिपा के रखते हैं या फिर स्कूल से आने जाने वाले रास्तों पर । अतैव जितना हो अपने बच्चों के साथ उनकी हर एक्टिविटी में शामिल रहें और राज्य की भावी पीढ़ी को नशे से मुक्त रखें ।